मोहर्रम पर ताजिए स्थापित आज निकलेगा यौम-ए-आशूरा का जुलूस

जोधपुर। मोहर्रम के पवित्र अवसर पर शहर भर में गुरुवार को पारंपरिक श्रद्धा और अकीदत के साथ ताजिए स्थापित किए गए। विभिन्न मोहल्लों, इमामबाड़ों और धार्मिक स्थलों पर आकर्षक ढंग से सजाए गए ताजियों के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में अकीदतमंद पहुंचे। इस दौरान लोगों ने फातिहा पढ़कर कर्बला के शहीदों, विशेष रूप से हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके साथियों को खिराज-ए-अकीदत पेश की। मोहर्रम की 10वीं तारीख, जिसे यौम-ए-आशूरा के रूप में मनाया जाता है, के अवसर पर शुक्रवार को शहर के विभिन्न क्षेत्रों से ताजिया जुलूस निकाले जाएंगे। इन जुलूसों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होकर कर्बला के शहीदों की याद में मातम और श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

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जोधपुर। मोहर्रम के पवित्र अवसर पर शहर भर में गुरुवार को पारंपरिक श्रद्धा और अकीदत के साथ ताजिए स्थापित किए गए। विभिन्न मोहल्लों, इमामबाड़ों और धार्मिक स्थलों पर आकर्षक ढंग से सजाए गए ताजियों के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में अकीदतमंद पहुंचे। इस दौरान लोगों ने फातिहा पढ़कर कर्बला के शहीदों, विशेष रूप से हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके साथियों को खिराज-ए-अकीदत पेश की।

मोहर्रम की 10वीं तारीख, जिसे यौम-ए-आशूरा के रूप में मनाया जाता है, के अवसर पर शुक्रवार को शहर के विभिन्न क्षेत्रों से ताजिया जुलूस निकाले जाएंगे। इन जुलूसों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होकर कर्बला के शहीदों की याद में मातम और श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। जुलूस निर्धारित मार्गों से होकर गुजरेंगे और विभिन्न स्थानों पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

यौम-ए-आशूरा को लेकर प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह सतर्क है। शहर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है, वहीं यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए भी आवश्यक प्रबंध किए गए हैं। पुलिस अधिकारियों ने आमजन से सहयोग बनाए रखने और निर्धारित यातायात निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार मोहर्रम का महीना इस्लामिक इतिहास की उस महान और प्रेरणादायक घटना की याद दिलाता है, जब कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके साथियों ने सत्य, न्याय, मानवता और धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। कर्बला का संदेश आज भी अन्याय के खिलाफ संघर्ष, धैर्य, त्याग और इंसानियत की रक्षा की प्रेरणा देता है।

शहर के विभिन्न इमामबाड़ों में देर रात तक मजलिसों, नौहाख्वानी और धार्मिक सभाओं का आयोजन जारी रहा। श्रद्धालुओं ने कर्बला की घटनाओं को याद करते हुए इमाम हुसैन (अ.स.) के बलिदान को नमन किया। शुक्रवार को यौम-ए-आशूरा के अवसर पर बड़ी संख्या में अकीदतमंद जुलूसों में शामिल होकर कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे तथा अमन, भाईचारे और इंसानियत का संदेश देंगे।

 
 
 
 
 
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Author
Rajendra Harsh
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