आयुर्वेद वि वि के कुलगुरु प्रोफेसर शुक्ल के करकमलों द्वारा हुआ नाड़ी परीक्षण सर्टिफिकेट कोर्स के ब्रोशर का विमोचन।
- Posted on 13 दिसम्बर 2025
- सामान्य समाचार
- By Rajendra Harsh
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आयुर्वेद वि वि के कुलगुरु प्रोफेसर शुक्ल के करकमलों द्वारा हुआ नाड़ी परीक्षण सर्टिफिकेट कोर्स के ब्रोशर का विमोचन।आयुर्वेद विश्वविद्यालय में सेमी-ऑनलाइन नाड़ी परीक्षण सर्टिफिकेट कोर्स के ब्रोशर का हुआ विमोचन।
आयुर्वेद वि वि के कुलगुरु प्रोफेसर शुक्ल के करकमलों द्वारा हुआ नाड़ी परीक्षण सर्टिफिकेट कोर्स के ब्रोशर का विमोचन।आयुर्वेद विश्वविद्यालय में सेमी-ऑनलाइन नाड़ी परीक्षण सर्टिफिकेट कोर्स के ब्रोशर का हुआ विमोचन।देश के आयुर्वेद मनीषी एवं चिकित्सक नाड़ी परीक्षा में पारंगत होकर चिकित्सा में सफल सिद्ध हो सकेंगे--प्रोफेसर शुक्ल
रोग-निदान की सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से समझ सकेंगे आयुर्वेद चिकित्सक --प्रोफेसर शुक्ल डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर में कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल के करकमलों द्वारा सेमी-ऑनलाइन नाड़ी परीक्षण सर्टिफिकेट कोर्स के ब्रोशर का विधिवत विमोचन किया गया।
यह सर्टिफिकेट कोर्स विश्वविद्यालय के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ़ आयुर्वेद के अंतर्गत संचालित स्नातकोत्तर क्रिया शारीर विभाग द्वारा आयोजित किया जा रहा है। कोर्स का संचालन 15 जनवरी 2026 से 14 फरवरी 2026 तक किया जाएगा। इस कोर्स हेतु ऑनलाइन आवेदन/पंजीकरण 15 दिसंबर 2025 से 10 जनवरी 2026 तक विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगा। इस अवसर पर कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल ने अपने संबोधन में कहा कि नाड़ी परीक्षण आयुर्वेद की एक विशिष्ट, वैज्ञानिक एवं गहन रोग-निदान पद्धति है, जिसके माध्यम से शरीर में विद्यमान दोष-दूष्य, धातु एवं अग्नि की स्थिति का सूक्ष्म एवं समग्र आकलन किया जाता है। पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षण तकनीकों एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने का यह प्रयास विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, चिकित्सीय एवं शोधात्मक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सिद्ध होगा साथ ही राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति आयोग नई दिल्ली को देश के समस्त आयुर्वेद चिकित्सकों को कोर्स करने के लिए प्रेरित करने हेतु विश्वविद्यालय द्वारा पत्र लिखा जाएगा।आगामी दिवसों में देश के विभिन्न प्रांतों के राजकीय सेवा में कार्यरत आयुर्वेद चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिए जाने हेतु रूपरेखा तैयार की जाएगी जिससे देश के आयुर्वेद चिकित्सक नाड़ी परीक्षा में पारंगत हो सकेंगे।
कार्यक्रम में प्राचार्य प्रोफेसर चंदन सिंह, आयुर्वेद संकाय अधिष्ठाता प्रोफेसर महेंद्र कुमार शर्मा, चिकित्सालय अधीक्षक प्रोफेसर गोविंद प्रसाद गुप्ता, परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजाराम अग्रवाल, डीन रिसर्च प्रोफेसर देवेंद्र चाहर, लाइब्रेरी निदेशक डॉ राकेश शर्मा, डॉ मनीषा गोयल,उप-कुलसचिव डॉ. मनोज अदलखा, कोर्स कोऑर्डिनेटर एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पूजा पारिक, डॉ. प्रियंका कुमारी, डॉ. मनीष यादव सहित विश्वविद्यालय के अनेक वरिष्ठ संकाय सदस्य एवं स्नातकोत्तर अध्येता उपस्थित रहे।
स्नातकोत्तर क्रिया शारीर विभाग के विभागाध्यक्ष एवं कोर्स नोडल अधिकारी प्रोफेसर दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 30 प्रतिभागियों का चयन किया जाएगा। कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों को 3 सप्ताह का ऑनलाइन सैद्धांतिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिसके पश्चात 7 दिवसीय हैंड्स-ऑन प्रायोगिक प्रशिक्षण विश्वविद्यालय परिसर में अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा संपन्न करवाया जाएगा।
यह सर्टिफिकेट कोर्स विशेष रूप से आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा एवं रोग-विज्ञान के विद्यार्थियों, अध्यापन कार्य से जुड़े शिक्षकों, प्रैक्टिस कर रहे चिकित्सकों तथा नाड़ी विज्ञान में गहन रुचि रखने वाले शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी रहेगा ।
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