सुदृढ़ समाज के निर्माण में युवा निभाएं निर्णायक भूमिका : अरुण कुमार

जोधपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ओर से युवा चिकित्सा एवं प्राध्यापक सम्मेलन का आयोजन आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय करवड़ और महालक्ष्मी कॉलेज, प्रताप नगर में किया गया। सम्मेलनों में मुख्य वक्ता संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार रहे। कार्यक्रम में आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलगुरु गोविंद सहाय शुक्ला मुख्य अतिथि रहे, जबकि अध्यक्षता प्रांत संघचालक हरदयाल वर्मा ने की। अरुण कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज परिवर्तन का बड़ा प्रयास है और संपूर्ण समाज को संगठित करने के उद्देश्य से कार्य करता है। संघ की 100 वर्ष की यात्रा को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष आत्मविश्लेषण का अवसर है।

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जोधपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ओर से युवा चिकित्सा एवं प्राध्यापक सम्मेलन का आयोजन आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय करवड़ और महालक्ष्मी कॉलेज, प्रताप नगर में किया गया। सम्मेलनों में मुख्य वक्ता संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार रहे। कार्यक्रम में आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलगुरु गोविंद सहाय शुक्ला मुख्य अतिथि रहे, जबकि अध्यक्षता प्रांत संघचालक हरदयाल वर्मा ने की।

अरुण कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज परिवर्तन का बड़ा प्रयास है और संपूर्ण समाज को संगठित करने के उद्देश्य से कार्य करता है। संघ की 100 वर्ष की यात्रा को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष आत्मविश्लेषण का अवसर है। हमें विचार करना चाहिए कि हम कहां से चले, क्या हासिल किया और कहां सुधार की आवश्यकता है। इसके आधार पर आने वाले समय की योजनाएं तैयार करनी होंगी।

उन्होंने बताया कि शताब्दी वर्ष के दौरान गृह संपर्क अभियान के माध्यम से 12 से 18 करोड़ परिवारों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही देशभर में करीब 20 हजार युवा सम्मेलन आयोजित कर युवाओं से संवाद और उनके सुझाव लेने की योजना है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र का भाग्य बदलने के लिए समाज में परिवर्तन आवश्यक है। कुछ महान व्यक्ति मिलकर महान राष्ट्र नहीं बना सकते, बल्कि जिस देश के नागरिक महान होते हैं, वही राष्ट्र महान बनता है। उन्होंने आत्मविस्मृति को देश की बड़ी समस्याओं में से एक बताते हुए कहा कि अपनी साझा विरासत और सांस्कृतिक एकता को समझना आवश्यक है।

अरुण कुमार ने युवाओं से राष्ट्र सर्वोपरि की भावना के साथ कार्य करने, अनुशासन और संगठन को मजबूत बनाने तथा समाज में आत्मविश्वास और आत्मगौरव बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि परिवर्तन केवल भाषणों से नहीं आता, बल्कि इसकी शुरुआत व्यक्ति स्वयं से करता है। समाज में व्याप्त भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्रभाव के साथ कार्य करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित समाज जीवन खड़ा करने के लिए सामाजिक समरसता, परिवार व्यवस्था को मजबूत करने, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्यों के पालन और स्वभाव को जागृत करने पर ध्यान देना होगा। समाज को तोड़ने वाली शक्तियां सफल न हों, इसके लिए वैचारिक क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने युवाओं से सुदृढ़ और स्वस्थ समाज के निर्माण में निर्णायक योगदान देने का आह्वान किया।

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Author
Rajendra Harsh
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