रंगाई-छपाई कारीगरों पर कार्रवाई से रोजगार संकट,

जोधपुर। नगर निगम द्वारा एनजीटी एवं जिला प्रशासन का हवाला देते हुए जोधपुर शहर में पारंपरिक रूप से रंगाई-छपाई का कार्य करने वाले हाथ के कारीगरों पर की जा रही कार्रवाई से हजारों परिवारों के सामने गंभीर रोजगार संकट खड़ा हो गया है। इस कार्रवाई को लेकर छीपा समाज में गहरी नाराजगी और चिंता व्याप्त है।

 

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रंगाई-छपाई कारीगरों पर कार्रवाई से रोजगार संकट, छीपा समाज ने जताई चिंता

जोधपुर। नगर निगम द्वारा एनजीटी एवं जिला प्रशासन का हवाला देते हुए जोधपुर शहर में पारंपरिक रूप से रंगाई-छपाई का कार्य करने वाले हाथ के कारीगरों पर की जा रही कार्रवाई से हजारों परिवारों के सामने गंभीर रोजगार संकट खड़ा हो गया है। इस कार्रवाई को लेकर छीपा समाज में गहरी नाराजगी और चिंता व्याप्त है।

छीपा समाज के संयोजक इकबाल मौलानी ने बताया कि पिछले कई दिनों से नगर निगम और प्रशासन द्वारा समाज के लोगों के घरों में होने वाले पुस्तैनी रंगाई-छपाई कार्य को अवैध बताकर रोक लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह वही पारंपरिक कार्य है जिसने जोधपुर को देश-विदेश में पहचान दिलाई है। बंधेज, लहरिया, चूंदड़ी, साफा, साड़ी और ओढ़नी जैसे प्रसिद्ध वस्त्र इन्हीं कारीगरों की मेहनत और कला का परिणाम हैं।

इकबाल मौलानी ने कहा कि घरों में सीमित स्तर पर किया जाने वाला यह कार्य पीढ़ियों से समाज की आजीविका का मुख्य साधन रहा है। अचानक की जा रही कार्रवाई से न केवल कारीगर बेरोजगार हो रहे हैं, बल्कि उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति भी डगमगा गई है। उन्होंने बताया कि इस कार्य से जुड़े हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ा है।

कारीगरों ने यह भी चिंता जताई कि घरेलू स्तर पर रंगाई-छपाई का काम बंद होने से जोधपुर के कपड़ा होलसेल बाजार पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। पारंपरिक वस्त्रों की आपूर्ति में कमी आने से व्यापार प्रभावित हो रहा है और बाजार में सुस्ती देखने को मिल रही है। साथ ही जोधपुर की सांस्कृतिक पहचान माने जाने वाले बंधेज और लहरिया जैसे हस्तशिल्प के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है।

छीपा समाज के प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि पर्यावरण संरक्षण के नियमों के साथ-साथ कारीगरों की आजीविका को भी ध्यान में रखा जाए और कोई ऐसा समाधान निकाला जाए, जिससे पारंपरिक उद्योग सुरक्षित रह सके। समाज का कहना है कि यदि समय रहते उचित निर्णय नहीं लिया गया तो इसका दूरगामी प्रभाव न केवल हजारों परिवारों, बल्कि जोधपुर की पहचान और सांस्कृतिक विरासत पर भी पड़ेगा।

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Author
Rajendra Harsh
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