पुलिस बनी मासूम की उम्मीद

जोधपुर। राजस्थान पुलिस की तत्परता, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय संवेदनशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण रविवार को सामने आया, जब राजीव गांधी नगर थाना पुलिस ने भटकी हुई एक पांच वर्षीय बालिका को उसके परिजनों से मिलाकर उनके चेहरे पर मुस्कान लौटा दी। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से एक मासूम बच्ची सुरक्षित अपने परिवार तक पहुंच सकी। जानकारी के अनुसार 21 जून 2026 को अभय कमांड सेंटर, जोधपुर से सूचना प्राप्त हुई कि लगभग पांच वर्षीय एक बालिका सूरजबस्ती क्षेत्र में अकेली घूम रही है।

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जोधपुर। राजस्थान पुलिस की तत्परता, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय संवेदनशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण रविवार को सामने आया, जब राजीव गांधी नगर थाना पुलिस ने भटकी हुई एक पांच वर्षीय बालिका को उसके परिजनों से मिलाकर उनके चेहरे पर मुस्कान लौटा दी। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से एक मासूम बच्ची सुरक्षित अपने परिवार तक पहुंच सकी।

जानकारी के अनुसार 21 जून 2026 को अभय कमांड सेंटर, जोधपुर से सूचना प्राप्त हुई कि लगभग पांच वर्षीय एक बालिका सूरजबस्ती क्षेत्र में अकेली घूम रही है। सूचना मिलते ही राजीव गांधी नगर थाना के हैड कांस्टेबल डूंगर सिंह और कांस्टेबल दिनेश सोडा चेतक वाहन के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे और बालिका को सुरक्षित संरक्षण में लिया।

पुलिसकर्मियों ने बच्ची से पूछताछ की तो उसने अपना नाम रोशनी बताया, लेकिन वह अपने घर का पता या परिजनों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे सकी। बालिका काफी डरी-सहमी हुई थी। ऐसे में पुलिसकर्मियों ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए उसे भरोसा दिलाया और उसके परिवार की तलाश शुरू की।

हैड कांस्टेबल डूंगर सिंह और कांस्टेबल दिनेश सोडा ने आसपास के लोगों से जानकारी जुटाई तथा क्षेत्र की विभिन्न गलियों और मोहल्लों में लगातार पूछताछ की। करीब पांच किलोमीटर तक खोजबीन करने के बाद पुलिस को नयापुरा चौखा क्षेत्र में बालिका के परिजनों का पता चला। आवश्यक पहचान और सत्यापन प्रक्रिया पूरी करने के बाद बालिका रोशनी को सकुशल उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया गया।

अपनी बेटी को सुरक्षित देखकर परिजनों की आंखें नम हो गईं। उन्होंने राजस्थान पुलिस और राजीव गांधी नगर थाना पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पुलिस की तत्परता के कारण उनकी बच्ची सुरक्षित वापस मिल सकी।

यह घटना पुलिस की जनसेवा और जनसुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। पुलिस अधिकारियों ने अभिभावकों से भी अपील की है कि छोटे बच्चों पर विशेष ध्यान रखें तथा उनके साथ स्नेहपूर्ण व्यवहार करें ताकि उन्हें भावनात्मक सुरक्षा का अनुभव हो और वे किसी भी परिस्थिति में स्वयं को सुरक्षित महसूस कर सकें। ऐसी घटनाएं समाज में पुलिस के मानवीय और संवेदनशील स्वरूप को भी उजागर करती हैं।

 
 
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Author
Rajendra Harsh
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