30 लाख रुपये की रिश्वत मामले में 10 माह से फरार तत्कालीन पटवारी

जयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने वर्ष 2025 के बहुचर्चित 30 लाख रुपये की रिश्वत प्रकरण में बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 9-10 माह से फरार चल रहे तत्कालीन पटवारी नरेन्द्र मीणा को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी जयपुर जिले की कालवाड़ तहसील के हाथोज पटवार हल्के में पटवारी के पद पर कार्यरत था। एसीबी आरोपी से पूछताछ कर मामले की आगे की जांच में जुटी हुई है। एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने बताया कि सितंबर 2025 में एक परिवादी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि हाथोज क्षेत्र में स्थित उसकी लगभग 10 बीघा भूमि का नामांतरण खोलने की एवज में तत्कालीन पटवारी नरेन्द्र मीणा ने स्वयं तथा तत्कालीन तहसीलदार के नाम पर 50 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।

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जयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने वर्ष 2025 के बहुचर्चित 30 लाख रुपये की रिश्वत प्रकरण में बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 9-10 माह से फरार चल रहे तत्कालीन पटवारी नरेन्द्र मीणा को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी जयपुर जिले की कालवाड़ तहसील के हाथोज पटवार हल्के में पटवारी के पद पर कार्यरत था। एसीबी आरोपी से पूछताछ कर मामले की आगे की जांच में जुटी हुई है।

एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने बताया कि सितंबर 2025 में एक परिवादी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि हाथोज क्षेत्र में स्थित उसकी लगभग 10 बीघा भूमि का नामांतरण खोलने की एवज में तत्कालीन पटवारी नरेन्द्र मीणा ने स्वयं तथा तत्कालीन तहसीलदार के नाम पर 50 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।

शिकायत के सत्यापन के दौरान रिश्वत मांग की पुष्टि हुई। जांच में सामने आया कि बाद में सौदा 30 लाख रुपये में तय किया गया और यह राशि कथित मध्यस्थ विकास शर्मा के माध्यम से लेने की योजना बनाई गई।

एसीबी ने 21 सितंबर 2025 को योजनाबद्ध ट्रैप कार्रवाई की। इस दौरान आरोपी पटवारी के निर्देश पर उसके सहयोगी एवं कथित मध्यस्थ विकास शर्मा को 30 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया था। हालांकि मुख्य आरोपी नरेन्द्र मीणा मौके से फरार होने में सफल रहा।

अनुसंधान के दौरान एसीबी को पर्याप्त साक्ष्य मिले कि नरेन्द्र मीणा ने अपने सहयोगी के साथ मिलकर परिवादी से अवैध रिश्वत की मांग की थी तथा मध्यस्थ के जरिए राशि प्राप्त करने का प्रयास किया। आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61(2) के तहत अपराध प्रमाणित पाया गया।

फरारी के दौरान एसीबी ने आरोपी को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 35(3) के तहत जांच में शामिल होने के लिए नोटिस भी जारी किया था, लेकिन वह लगातार फरार रहा। एसीबी की टीम उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए थी।

विश्वसनीय सूचना मिलने पर एसीबी ने जयपुर के चम्पापुरा, कालवाड़ रोड स्थित आरोपी के निवास पर दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई उपमहानिरीक्षक डॉ. रामेश्वर सिंह के सुपरविजन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय सिंह के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने की।

एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव एवं महानिरीक्षक एस. परिमला के सुपरविजन में आरोपी से पूछताछ जारी है। उसे न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड लेने की कार्रवाई की जाएगी। ब्यूरो ने आमजन से भ्रष्टाचार की शिकायतें टोल फ्री हेल्पलाइन 1064 और व्हाट्सएप हेल्पलाइन के माध्यम से दर्ज कराने की अपील भी की है।

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Author
Rajendra Harsh
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