करोड़ों की सड़क पहली बारिश में उखड़ी

जोधपुर। एम्स रोड से संगरिया फांटा तक औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले रासायनिक पानी की निकासी के लिए बिछाई गई पाइपलाइन के बाद बनाई गई नई सड़क पहली ही मानसूनी बारिश में जवाब दे गई। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थिति तब और अधिक चर्चा का विषय बन गई जब सड़क पर बने गड्ढों को भरने पहुंचे प्रशासनिक अमले का ट्रैक्टर ही गड्ढे में धंस गया। ट्रैक्टर-ट्रॉली और मजदूर सड़क की मरम्मत करने पहुंचे थे, लेकिन कमजोर सड़क के कारण ट्रैक्टर का पहिया गहरे गड्ढे में फंस गया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए हैरानी का कारण बन गया और कई लोगों ने इसका वीडियो भी बना लिया।

 

 

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जोधपुर। एम्स रोड से संगरिया फांटा तक औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले रासायनिक पानी की निकासी के लिए बिछाई गई पाइपलाइन के बाद बनाई गई नई सड़क पहली ही मानसूनी बारिश में जवाब दे गई। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़क की मरम्मत केवल औपचारिकता बनकर रह गई। सड़क की सही तरीके से भराई और संपीड़न (कम्पेक्शन) नहीं किया गया, वहीं पैचवर्क भी मानकों के अनुरूप नहीं हुआ। परिणामस्वरूप पहली ही बारिश में सड़क कई स्थानों पर धंस गई और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थिति तब और अधिक चर्चा का विषय बन गई जब सड़क पर बने गड्ढों को भरने पहुंचे प्रशासनिक अमले का ट्रैक्टर ही गड्ढे में धंस गया। ट्रैक्टर-ट्रॉली और मजदूर सड़क की मरम्मत करने पहुंचे थे, लेकिन कमजोर सड़क के कारण ट्रैक्टर का पहिया गहरे गड्ढे में फंस गया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए हैरानी का कारण बन गया और कई लोगों ने इसका वीडियो भी बना लिया।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि सड़क पहली ही बारिश नहीं झेल सकी तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोगों ने आरोप लगाया कि पाइपलाइन डालने के बाद सड़क को पहले जैसी मजबूत स्थिति में बहाल नहीं किया गया, जिससे यह हालात बने।

क्षेत्रवासियों ने सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य की तकनीकी जांच कराने, जिम्मेदार ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा सड़क का पुनर्निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हुआ होता तो पहली ही बारिश में सड़क की यह स्थिति नहीं होती।

अब लोगों की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और सड़क निर्माण में हुई कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।

 
 
 
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Author
Rajendra Harsh
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