आयुर्वेद विश्वविद्यालय में ‘शोध-कौशलम्’ कार्यशाला का समापन

जोधपुर। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर के स्नातकोत्तर आयुर्वेद संस्थान (पीजीआईए) के स्वस्थवृत्त एवं योग विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘शोध-कौशलम्’ कार्यशाला का समापन गरिमामय समारोह के साथ हुआ। समापन समारोह में शोध की गुणवत्ता, नवाचार और साक्ष्य-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल ने की। मुख्य अतिथि ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) के निदेशक प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति तथा विशिष्ट अतिथि रोहतक के प्रो. अनिल कुमार शर्मा रहे।

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जोधपुर। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर के स्नातकोत्तर आयुर्वेद संस्थान (पीजीआईए) के स्वस्थवृत्त एवं योग विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘शोध-कौशलम्’ कार्यशाला का समापन गरिमामय समारोह के साथ हुआ। समापन समारोह में शोध की गुणवत्ता, नवाचार और साक्ष्य-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल ने की। मुख्य अतिथि ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) के निदेशक प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति तथा विशिष्ट अतिथि रोहतक के प्रो. अनिल कुमार शर्मा रहे। समारोह में कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता और विभिन्न तकनीकी सत्रों का भी उल्लेख किया गया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलगुरु प्रो. गोविंद सहाय शुक्ल ने स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं से गुणवत्तापूर्ण और समाजोपयोगी शोध करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शोध केवल शैक्षणिक उपलब्धि तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य समाज और स्वास्थ्य क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करना भी होना चाहिए।

मुख्य अतिथि प्रो. प्रदीप कुमार प्रजापति ने कहा कि अनुसंधान केवल उपाधि प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रभावी साधन है। उन्होंने प्रतिभागियों को मौलिक, साक्ष्य-आधारित और उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान के लिए प्रेरित करते हुए वैज्ञानिक सोच विकसित करने पर बल दिया।

विशिष्ट अतिथि प्रो. अनिल कुमार शर्मा ने शोध लेखन, वैज्ञानिक प्रकाशन और अनुसंधान की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सतत अध्ययन, अनुशासन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि बेहतर शोध से ही आयुर्वेद के वैज्ञानिक पक्ष को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूती मिलेगी।

कार्यक्रम की शुरुआत में स्वस्थवृत्त एवं योग विभागाध्यक्ष प्रो. ब्रह्मानंद शर्मा ने कार्यशाला का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए दो दिनों में आयोजित तकनीकी सत्रों, विशेषज्ञ व्याख्यानों और प्रशिक्षण गतिविधियों की जानकारी दी।

समारोह में कुलसचिव प्रो. गोविंद प्रसाद गुप्ता, आयुर्वेद अधिष्ठाता प्रो. महेंद्र कुमार शर्मा, पीजीआईए प्राचार्य प्रो. चंदन सिंह, डीन रिसर्च प्रो. देवेंद्र चाहर, उपकुलसचिव डॉ. मनोज अदलखा सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक, शोधकर्ता और विद्यार्थी उपस्थित रहे। अंत में प्राचार्य प्रो. चंदन सिंह ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, आयोजन समिति और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यशाला की सफलता पर प्रसन्नता जताई।

 
 
 
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Author
Rajendra Harsh
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