विश्व स्तनपान सप्ताह: माताओं और शिशुओं के स्वास्थ्य के लिए जागरूकता अभियान, NNF जोधपुर की पहल

जोधपुर, 4 अगस्त 2026। राष्ट्रीय नवजात शिशु मंच (NNF) जोधपुर द्वारा 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम "एक स्थायी जीवन की शुरुआत के लिए स्तनपान: जो कारगर है उसे मजबूत करें" (Breastfeeding for a Sustainable Start in Life: Strengthen What Works) रखी गई है। यह अभियान विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ (UNICEF) के आह्वान पर आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य माताओं और शिशुओं के लिए स्तनपान को बढ़ावा देना तथा "वॉर्म चेन ऑफ सपोर्ट" (Warm Chain of Support) को मजबूत करना है। NNF जोधपुर की ओर से पूरे सप्ताह शहर के प्रमुख अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्तनपान जागरूकता एवं परामर्श शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।

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जोधपुर, 4 अगस्त 2026। राष्ट्रीय नवजात शिशु मंच (NNF) जोधपुर द्वारा 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम "एक स्थायी जीवन की शुरुआत के लिए स्तनपान: जो कारगर है उसे मजबूत करें" (Breastfeeding for a Sustainable Start in Life: Strengthen What Works) रखी गई है। यह अभियान विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ (UNICEF) के आह्वान पर आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य माताओं और शिशुओं के लिए स्तनपान को बढ़ावा देना तथा "वॉर्म चेन ऑफ सपोर्ट" (Warm Chain of Support) को मजबूत करना है।

NNF जोधपुर की ओर से पूरे सप्ताह शहर के प्रमुख अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्तनपान जागरूकता एवं परामर्श शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही नर्सिंग स्टाफ, आशा सहयोगिनियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए स्तनपान की सही तकनीक, परामर्श और नवजात शिशु देखभाल पर विशेष कार्यशालाएं भी आयोजित की जा रही हैं।

गर्भवती महिलाओं को जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करने के महत्व, शिशु को सही तरीके से गोद में पकड़ने और स्तनपान की उचित पोजीशन एवं अटैचमेंट का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा कार्यस्थलों पर स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए सहयोगी वातावरण विकसित करने को लेकर भी जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

NNF जोधपुर ने अपने संदेश में कहा है कि स्तनपान केवल शिशु का आहार नहीं, बल्कि उसका पहला प्राकृतिक टीकाकरण है। इससे बच्चों को कुपोषण, डायरिया और निमोनिया जैसे संक्रमणों से सुरक्षा मिलती है, वहीं माताओं में स्तन एवं अंडाशय के कैंसर का खतरा भी कम होता है। यह पूरी तरह प्राकृतिक, सुरक्षित, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प है।

मंच ने सभी अभिभावकों और परिवारों से अपील की है कि जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान अवश्य शुरू कराया जाए, पहले छह माह तक शिशु को केवल स्तनपान ही कराया जाए तथा छह माह बाद पूरक आहार के साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखा जाए। साथ ही फॉर्मूला मिल्क के भ्रामक और अनुचित विज्ञापनों से बचने की भी सलाह दी गई है।

NNF जोधपुर के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप जैन, सचिव डॉ. नीरज गुप्ता और कोषाध्यक्ष डॉ. कपिल रहेजा ने सभी परिवारों, समुदायों, कार्यस्थलों और स्वास्थ्य संस्थानों से स्तनपान कराने वाली माताओं को पूरा सहयोग देने की अपील करते हुए कहा कि स्वस्थ और सशक्त समाज की शुरुआत स्वस्थ माताओं और शिशुओं से होती है।

 
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Author
Rajendra Harsh
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