विश्व स्तनपान सप्ताह (1–7 अगस्त 2026) का सफल आयोजन
- Posted on 8 अगस्त 2026
- जोधपुर
- By Rajendra Harsh
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जोधपुर, 8 अगस्त। राष्ट्रीय नवजात शिशु फाउंडेशन (NNF) जोधपुर एवं NNF राजपूताना की ओर से विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत 1 से 7 अगस्त तक शहर के विभिन्न अस्पतालों में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। बालाजी हॉस्पिटल, वसुंधरा हॉस्पिटल, सरोज हॉस्पिटल और त्रिनय हॉस्पिटल में आयोजित कार्यक्रमों में गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं की माताओं और उनके परिजनों को स्तनपान के महत्व की जानकारी दी गई। इस वर्ष विश्व स्तनपान सप्ताह का वैश्विक संदेश “Breastfeeding for a Sustainable Start in Life: Strengthen What Works” रहा। कार्यक्रमों के दौरान विशेषज्ञों ने माताओं को जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करने, शिशु को पहले छह माह तक केवल मां का दूध देने तथा इसके बाद पूरक आहार के साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने के लिए जागरूक किया।
जोधपुर, 8 अगस्त। राष्ट्रीय नवजात शिशु फाउंडेशन (NNF) जोधपुर एवं NNF राजपूताना की ओर से विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत 1 से 7 अगस्त तक शहर के विभिन्न अस्पतालों में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। बालाजी हॉस्पिटल, वसुंधरा हॉस्पिटल, सरोज हॉस्पिटल और त्रिनय हॉस्पिटल में आयोजित कार्यक्रमों में गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं की माताओं और उनके परिजनों को स्तनपान के महत्व की जानकारी दी गई।
इस वर्ष विश्व स्तनपान सप्ताह का वैश्विक संदेश “Breastfeeding for a Sustainable Start in Life: Strengthen What Works” रहा। कार्यक्रमों के दौरान विशेषज्ञों ने माताओं को जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करने, शिशु को पहले छह माह तक केवल मां का दूध देने तथा इसके बाद पूरक आहार के साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने के लिए जागरूक किया।
विशेषज्ञों ने बताया कि मां का दूध नवजात के लिए संपूर्ण एवं सर्वोत्तम आहार है। इसमें मौजूद पोषक तत्व शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, संक्रमणों से बचाव और मस्तिष्क के समुचित विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं, स्तनपान कराने से माताओं के स्वास्थ्य को भी लाभ मिलता है और स्तन एवं डिम्बग्रंथि के कैंसर के जोखिम में कमी आती है।
NNF जोधपुर के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप जैन ने कहा कि स्तनपान केवल पोषण का माध्यम नहीं, बल्कि शिशु के स्वस्थ जीवन की मजबूत नींव है। प्रत्येक मां को परिवार, समाज और स्वास्थ्यकर्मियों की ओर से निरंतर सहयोग मिलना जरूरी है।
मेंटर डॉ. अनुराग सिंह ने कहा कि शिशु मृत्यु दर और कुपोषण को कम करने में स्तनपान की अहम भूमिका है। सचिव डॉ. नीरज गुप्ता ने बताया कि सप्ताहभर स्वास्थ्य शिक्षा सत्र, मातृ परामर्श, प्रश्नोत्तर कार्यक्रम और विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं।
कोषाध्यक्ष डॉ. कपिल राहेजा ने सहयोगी अस्पतालों के चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों का आभार जताया। NNF जोधपुर ने अभिभावकों से अपील की कि नवजात को पहले छह माह तक केवल मां का दूध दिया जाए और माताओं को परिवार तथा कार्यस्थल पर स्तनपान के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
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