जोधपुर शहर के 10 केन्द्रों पर पुष्यनक्षत्र योग में होगा स्वर्णप्राशन
- Posted on 16 जून 2026
- सामान्य समाचार
- By Rajendra Harsh
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डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर द्वारा संचालित स्वर्णप्राशन कार्यक्रम दिनांक 17 जून 2026 बुधवार को पुष्यनक्षत्र योग में AIIMS, जोधपुर की आयुष ओ.पी.डी. में, जालौरी गेट के निकट शनिश्चर थान, सम्राट अशोक उद्यान के सामने भवानी आदर्श विद्या मंदिर, चौपासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित लवकुश गृह-नवजीवन संस्थान, बाल बसेरा सेवा संस्थान, मगरा पूंजला स्थित राजकीय किशोर बालगृह, विश्वविद्यालय आयुर्वेद चिकित्सालय, करवड़, गोद-ग्राम घड़ाव के राजकीय विद्यालय, विक्टोरियन किड्स स्कूल एवं राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल मोकलावास, ज्ञानदिशा स्कूल बालोतरा में आयोजित किया जायेगा।
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर द्वारा संचालित स्वर्णप्राशन कार्यक्रम दिनांक 17 जून 2026 बुधवार को पुष्यनक्षत्र योग में AIIMS, जोधपुर की आयुष ओ.पी.डी. में, जालौरी गेट के निकट शनिश्चर थान, सम्राट अशोक उद्यान के सामने भवानी आदर्श विद्या मंदिर, चौपासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित लवकुश गृह-नवजीवन संस्थान, बाल बसेरा सेवा संस्थान, मगरा पूंजला स्थित राजकीय किशोर बालगृह, विश्वविद्यालय आयुर्वेद चिकित्सालय, करवड़, गोद-ग्राम घड़ाव के राजकीय विद्यालय, विक्टोरियन किड्स स्कूल एवं राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल मोकलावास, ज्ञानदिशा स्कूल बालोतरा में आयोजित किया जायेगा।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविन्द सहाय शुक्ल ने बताया कि आमजनता में बच्चों के सर्वांगीण स्वास्थ्य में स्वर्णप्राशन के लाभ और महत्त्व के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिये प्रतिमाह की भांति आज दिनांक 17 जून 2026 बुधवार को जोधपुर शहर के 10 केन्द्रों पर स्वर्णप्राशन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है तथा प्रतिमाह पुष्य नक्षत्र के दिन विश्वविद्यालय के बाल रोग विभागान्तर्गत करवड़ स्थित चिकित्सालय सहित 10 केन्द्रों पर सैकड़ों की संख्या में अभिभावक अपने बच्चों को नियमित रूप से स्वर्णप्राशन ड्रॉप्स पिलाने के लिये आ रहे हैं।
स्वर्ण प्राशन की अगली खुराक आगामी पुष्य नक्षत्र दिनांक 15 जुलाई 2026 शनिवार को उक्त 10 स्थानों पर बच्चों को पिलाई जायेगी। स्नातकोत्तर बालरोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. हरीश कुमार सिंघल ने विभिन्न केन्द्रों पर सुचारु रूप से व्यवस्था के लिये चिकित्सकों एवं स्नातकोत्तर अध्येताओं की ड्यूटी लगाकर कार्य सम्पादन करने के लिए निर्देशित किया।
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