सोलर नीति में भ्रामक स्थिति से बाजार में मंदी
- Posted on 2 जुलाई 2026
- सामान्य समाचार
- By Rajendra Harsh
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जोधपुर। केंद्र सरकार की सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के बीच डीसीआर (Domestic Content Requirement) और नॉन-डीसीआर सोलर पैनलों को लेकर बनी असमंजस की स्थिति का असर अब सोलर बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। सोलर कारोबारियों और वेंडरों का कहना है कि स्पष्ट नीति के अभाव में घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्र के ग्राहक भी नए सोलर प्लांट लगाने से हिचकिचा रहे हैं। कारोबारियों के अनुसार प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत सब्सिडी का लाभ लेने के लिए डीसीआर पैनल अनिवार्य किए गए हैं। हालांकि, डीसीआर पैनलों की कीमत नॉन-डीसीआर पैनलों की तुलना में प्रति किलोवाट लगभग 10 हजार रुपये तक अधिक पड़ती है।
जोधपुर। केंद्र सरकार की सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के बीच डीसीआर (Domestic Content Requirement) और नॉन-डीसीआर सोलर पैनलों को लेकर बनी असमंजस की स्थिति का असर अब सोलर बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। सोलर कारोबारियों और वेंडरों का कहना है कि स्पष्ट नीति के अभाव में घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्र के ग्राहक भी नए सोलर प्लांट लगाने से हिचकिचा रहे हैं।
कारोबारियों के अनुसार प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत सब्सिडी का लाभ लेने के लिए डीसीआर पैनल अनिवार्य किए गए हैं। हालांकि, डीसीआर पैनलों की कीमत नॉन-डीसीआर पैनलों की तुलना में प्रति किलोवाट लगभग 10 हजार रुपये तक अधिक पड़ती है। इससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उनका कहना है कि यदि डीसीआर पैनलों की कीमत नॉन-डीसीआर पैनलों के बराबर हो जाए तो अधिक लोग सरकारी योजना से जुड़ सकेंगे।
सोलर क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि सबसे अधिक परेशानी कमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ताओं को हो रही है। इन श्रेणी के उपभोक्ताओं को न तो सब्सिडी मिलती है और न ही अतिरिक्त बिजली उत्पादन पर कोई विशेष प्रोत्साहन राशि। ऐसे में महंगे डीसीआर पैनल लगाने से उद्योगों की लागत बढ़ जाती है, जिसके कारण कई परियोजनाएं फिलहाल टल रही हैं।
उन्होंने बताया कि 100 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता के औद्योगिक सोलर प्लांट लगाने के संबंध में भी स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध नहीं हैं। पीएम सूर्य घर पोर्टल पर केवल घरेलू उपभोक्ताओं के लिए आवेदन की सुविधा दिखाई देती है, जबकि कमर्शियल परियोजनाओं के लिए अलग विकल्प या प्रक्रिया उपलब्ध नहीं है। इससे वेंडरों और उपभोक्ताओं के बीच यह भ्रम बना हुआ है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स में डीसीआर पैनल अनिवार्य हैं या नॉन-डीसीआर पैनल भी लगाए जा सकते हैं।
सोलर कारोबारियों का यह भी कहना है कि संबंधित विभागों में भी इस विषय पर एक जैसी जानकारी उपलब्ध नहीं है। अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग सलाह मिलने से ग्राहकों को निर्णय लेने में कठिनाई हो रही है।
सोलर उद्योग से जुड़े लोगों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि डीसीआर और नॉन-डीसीआर पैनलों को लेकर स्पष्ट एवं एकरूप नीति जारी की जाए। साथ ही कमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए अलग पोर्टल, स्पष्ट दिशा-निर्देश, आवश्यक प्रोत्साहन और डीसीआर पैनलों की कीमतों को प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि इससे सौर ऊर्जा क्षेत्र को नई गति मिलेगी, निवेश बढ़ेगा और स्वच्छ ऊर्जा के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।
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