समाजसेवी किशन लाल सोनगरा की देहदान से मिसाल
- Posted on 6 सितम्बर 2026
- जोधपुर
- By Rajendra Harsh
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जोधपुर/प्रतापनगर। समाजसेवी स्व. किशन लाल सोनगरा के निधन के बाद उनके परिवार ने अनुकरणीय पहल करते हुए उनकी देह चिकित्सा शिक्षा के लिए दान कर दी। उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप पार्थिव शरीर को एसएन मेडिकल कॉलेज, जोधपुर को समर्पित किया गया। परिवार के इस निर्णय ने मानव सेवा की भावना को मृत्यु के बाद भी जीवित रखने का प्रेरक संदेश दिया। किशन लाल सोनगरा का आकस्मिक निधन 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को शाम करीब 5 बजे हुआ। निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए देहदान का निर्णय लिया। अंतिम यात्रा के दौरान पार्थिव शरीर को मथुरादास माथुर अस्पताल से एसएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद देह चिकित्सा शिक्षा के लिए समर्पित कर दी गई।
जोधपुर/प्रतापनगर। समाजसेवी स्व. किशन लाल सोनगरा के निधन के बाद उनके परिवार ने अनुकरणीय पहल करते हुए उनकी देह चिकित्सा शिक्षा के लिए दान कर दी। उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप पार्थिव शरीर को एसएन मेडिकल कॉलेज, जोधपुर को समर्पित किया गया। परिवार के इस निर्णय ने मानव सेवा की भावना को मृत्यु के बाद भी जीवित रखने का प्रेरक संदेश दिया।
किशन लाल सोनगरा का आकस्मिक निधन 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को शाम करीब 5 बजे हुआ। निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए देहदान का निर्णय लिया। अंतिम यात्रा के दौरान पार्थिव शरीर को मथुरादास माथुर अस्पताल से एसएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद देह चिकित्सा शिक्षा के लिए समर्पित कर दी गई।
देहदान का यह निर्णय परिवार की संवेदनशील सोच और समाजसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में देहदान का विशेष महत्व है। दान की गई देह मेडिकल विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना, अंगों की बनावट और शरीर की विभिन्न प्रणालियों को व्यावहारिक रूप से समझने में मदद करती है। इससे भावी चिकित्सकों के अध्ययन और प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।
परिजनों ने बताया कि किशन लाल सोनगरा जीवनभर समाजसेवा की भावना से जुड़े रहे और जरूरतमंदों की सहायता को प्राथमिकता देते थे। उनके निधन के बाद परिवार द्वारा लिया गया देहदान का निर्णय उनके सेवा भाव को आगे बढ़ाने वाला कदम है।
स्व. किशन लाल सोनगरा का देहदान समाज के लिए यह संदेश देता है कि मानव सेवा केवल जीवन तक सीमित नहीं है। मृत्यु के बाद भी शरीर को चिकित्सा शिक्षा के लिए समर्पित कर आने वाली पीढ़ियों के भविष्य निर्माण में योगदान दिया जा सकता है।
अंतिम विदाई भी बनी मानव सेवा की मिसाल, जहां एक समाजसेवी की अंतिम इच्छा ने मेडिकल विद्यार्थियों की शिक्षा और समाज में देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया।
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