926 आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी पदों पर RPSC भर्ती और डेपुटेशन खत्म करने की मांग तेज

जयपुर, 3 अगस्त। राजस्थान में 926 रिक्त आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी पदों पर नियमित भर्ती की मांग को लेकर प्रदेशभर के बेरोजगार आयुर्वेद चिकित्सकों का आंदोलन तेज हो गया है। सरकार द्वारा इन पदों पर नियमित भर्ती के बजाय सेवानिवृत्त आयुर्वेद चिकित्सकों को संविदा पर नियुक्त करने के निर्णय के विरोध में शनिवार को विभिन्न जिलों के राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालयों में युवा चिकित्सकों ने कैंडल मार्च, रैलियां और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 926 रिक्त पदों पर राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के माध्यम से नियमित भर्ती कराने के बजाय संविदा नियुक्तियों का निर्णय प्रदेश के हजारों बीएएमएस एवं एमडी/एमएस आयुर्वेद चिकित्सकों के रोजगार के अवसरों को प्रभावित करेगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि सभी रिक्त पदों पर पारदर्शी और नियमित भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए।

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जयपुर, 3 अगस्त। राजस्थान में 926 रिक्त आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी पदों पर नियमित भर्ती की मांग को लेकर प्रदेशभर के बेरोजगार आयुर्वेद चिकित्सकों का आंदोलन तेज हो गया है। सरकार द्वारा इन पदों पर नियमित भर्ती के बजाय सेवानिवृत्त आयुर्वेद चिकित्सकों को संविदा पर नियुक्त करने के निर्णय के विरोध में शनिवार को विभिन्न जिलों के राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालयों में युवा चिकित्सकों ने कैंडल मार्च, रैलियां और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 926 रिक्त पदों पर राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के माध्यम से नियमित भर्ती कराने के बजाय संविदा नियुक्तियों का निर्णय प्रदेश के हजारों बीएएमएस एवं एमडी/एमएस आयुर्वेद चिकित्सकों के रोजगार के अवसरों को प्रभावित करेगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि सभी रिक्त पदों पर पारदर्शी और नियमित भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए।

आयुर्वेद चिकित्सकों ने राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालयों में लंबे समय से लागू डेपुटेशन व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि पिछले लगभग तीन वर्षों से प्रदेश के आठ राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालयों में प्रोफेसर, रीडर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) के माध्यम से नियुक्तियां की जा रही हैं। इससे योग्य एमडी/एमएस आयुर्वेद विशेषज्ञों को नियमित शैक्षणिक सेवाओं में अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों के अनुसार, नियमित शैक्षणिक नियुक्तियां नहीं होने से केवल चिकित्सकों का भविष्य ही प्रभावित नहीं हो रहा, बल्कि राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (NCISM) के मानकों के अनुरूप शिक्षण व्यवस्था, क्लीनिकल प्रशिक्षण और विद्यार्थियों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर भी असर पड़ रहा है।

युवा आयुर्वेद चिकित्सकों ने सरकार के समक्ष दो प्रमुख मांगें रखीं। पहली, 926 रिक्त आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी पदों पर RPSC के माध्यम से शीघ्र नियमित भर्ती शुरू की जाए। दूसरी, राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालयों में डेपुटेशन व्यवस्था समाप्त कर प्रोफेसर, रीडर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भी RPSC के माध्यम से नियमित भर्ती कराई जाए।

आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कहा कि यदि सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो प्रदेशभर के युवा आयुर्वेद चिकित्सक जयपुर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन मांगें पूरी नहीं होने पर इसे चरणबद्ध तरीके से और व्यापक बनाया जाएगा। चिकित्सकों ने सरकार से युवाओं के रोजगार और आयुर्वेद शिक्षा की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए शीघ्र निर्णय लेने की अपील की।

 
 
 
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Author
Rajendra Harsh
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