शिक्षा के मंदिरों को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने देंगे
- Posted on 22 अगस्त 2026
- सामान्य समाचार
- By Rajendra Harsh
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जोधपुर/जयपुर। राजकीय विद्यालयों में कथित राजनीतिक हस्तक्षेप और बाहरी दखल के मुद्दे पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) ने कड़ा रुख अपनाया है। महासंघ ने कहा कि शिक्षा के मंदिरों को किसी भी कीमत पर राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा। साथ ही शिक्षकों को राजनीतिक गतिविधियों या दबाव का हिस्सा बनाए जाने का भी पुरजोर विरोध किया गया। महासंघ ने हाल की एक घटना का हवाला देते हुए कहा कि प्राप्त जानकारी के अनुसार सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका के साथ कुछ बाहरी लोगों द्वारा एक राजकीय विद्यालय में निरीक्षण का प्रयास किया गया, जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया। इस दौरान विवाद बढ़ने और कथित गाली-गलौज तथा मारपीट की स्थिति सामने आने की बात कही गई है।
जोधपुर/जयपुर। राजकीय विद्यालयों में कथित राजनीतिक हस्तक्षेप और बाहरी दखल के मुद्दे पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) ने कड़ा रुख अपनाया है। महासंघ ने कहा कि शिक्षा के मंदिरों को किसी भी कीमत पर राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा। साथ ही शिक्षकों को राजनीतिक गतिविधियों या दबाव का हिस्सा बनाए जाने का भी पुरजोर विरोध किया गया।
महासंघ ने हाल की एक घटना का हवाला देते हुए कहा कि प्राप्त जानकारी के अनुसार सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका के साथ कुछ बाहरी लोगों द्वारा एक राजकीय विद्यालय में निरीक्षण का प्रयास किया गया, जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया। इस दौरान विवाद बढ़ने और कथित गाली-गलौज तथा मारपीट की स्थिति सामने आने की बात कही गई है। महासंघ ने स्पष्ट किया कि हिंसा और मारपीट का किसी भी परिस्थिति में समर्थन नहीं किया जा सकता।
महासंघ ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति या संगठन को राजकीय विद्यालय की व्यवस्था, सुविधाओं अथवा शैक्षणिक स्थिति को लेकर कोई आपत्ति है तो इसके लिए शिक्षा विभाग और प्रशासन के निर्धारित माध्यम उपलब्ध हैं। विद्यालय परिसर में बिना निर्धारित प्रक्रिया के प्रवेश कर राजनीतिक विवाद खड़ा करना उचित नहीं है। महासंघ ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि विद्यालय में शिक्षा होगी, राजनीति नहीं।
महासंघ के अनुसार राजस्थान सरकार ने विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए पिछले कुछ समय में चरणबद्ध तरीके से कई प्रयास किए हैं। संसाधनों, शिक्षण व्यवस्था, अनुशासन और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने की प्रक्रिया लगातार जारी है। महासंघ ने कहा कि राजनीति करना लोकतांत्रिक अधिकार हो सकता है, लेकिन राजकीय विद्यालयों को राजनीतिक संघर्ष का मंच बनाना स्वीकार्य नहीं है।
महासंघ ने यह भी कहा कि शिक्षकों पर राजनीतिक दबाव डालना या उन्हें राजनीतिक गतिविधियों में शामिल करने का प्रयास शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है। शिक्षक विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए हैं, किसी राजनीतिक एजेंडे के लिए नहीं।
महासंघ ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर द्वारा शिक्षा व्यवस्था में सुधार के प्रयासों का समर्थन किया। संगठन ने विद्यालयों में बाहरी और राजनीतिक हस्तक्षेप नियंत्रित करने संबंधी दिशा-निर्देशों को विद्यालयों में सुरक्षित एवं अनुशासित शैक्षणिक वातावरण के लिए जरूरी बताया। महासंघ ने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत संस्था प्रधान की अनुमति लेकर विद्यालय में प्रवेश किया जा सकता है और नियमों का पालन सभी को करना चाहिए।
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