श्री प्रेम प्रकाश आश्रम में स्वामी टेऊँराम जी महाराज का चौथ पर्व श्रद्धा और भक्ति से मनाया

जोधपुर। आस्था के प्रमुख केंद्र ज्वाला विहार स्थित श्री प्रेम प्रकाश आश्रम में आचार्य सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज का मासिक जन्मोत्सव ‘चौथ पर्व’ श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव के साथ हर्षोल्लास से मनाया गया। दो दिवसीय आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर सेवादार घनश्याम हर्षा ने बताया कि इस पावन अवसर पर पूज्य संत श्री शंभू लाल साईं ब्यावर से तथा पूज्य संत जीतू राम साईं चेन्नई एवं रामेश्वरम की पावन यात्रा के बाद प्रेम प्रकाश आश्रम जोधपुर पहुंचे। आश्रम की प्रेम प्रकाश मंडली की ओर से दोनों संतों का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया।

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जोधपुर। आस्था के प्रमुख केंद्र ज्वाला विहार स्थित श्री प्रेम प्रकाश आश्रम में आचार्य सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज का मासिक जन्मोत्सव ‘चौथ पर्व’ श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव के साथ हर्षोल्लास से मनाया गया। दो दिवसीय आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया।

मंदिर सेवादार घनश्याम हर्षा ने बताया कि इस पावन अवसर पर पूज्य संत श्री शंभू लाल साईं ब्यावर से तथा पूज्य संत जीतू राम साईं चेन्नई एवं रामेश्वरम की पावन यात्रा के बाद प्रेम प्रकाश आश्रम जोधपुर पहुंचे। आश्रम की प्रेम प्रकाश मंडली की ओर से दोनों संतों का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया।

संत जीतू राम ने बताया कि श्री सतगुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज का पावन चौथ महोत्सव दोनों संतों के सानिध्य में श्रद्धापूर्वक मनाया गया। उत्सव के दौरान प्रभु को रिझाने के लिए विशेष भोग अर्पित किया गया। ग्रीष्म ऋतु को देखते हुए भगवान के समक्ष 56 व्यंजनों का थाल समर्पित किया गया।

सायंकाल 5:30 बजे से संगीतमय ‘ब्रह्म दर्शनी’ पाठ का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। पूज्य संत श्री शंभू लाल साईं महाराज ने ब्रह्म दर्शनी की महिमा बताते हुए कहा कि यह ग्रंथ ब्रह्म ज्ञान का भंडार है। उन्होंने श्रद्धालुओं को इसके आध्यात्मिक महत्व से अवगत कराया और कहा कि जिस प्रकार रामायण में सुंदरकांड का पाठ श्रद्धा से किया जाता है, उसी प्रकार ब्रह्म दर्शनी का पाठ भी साधना और आत्मिक शांति का मार्ग प्रशस्त करता है।

आयोजन के दौरान आश्रम में धार्मिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन और पाठ में भाग लेकर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया। संतों के प्रवचन से श्रद्धालुओं को धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिली।

महाप्रसादी के रूप में डोडा चटनी के साथ विभिन्न प्रकार के सिंधी व्यंजन तैयार किए गए। इनमें हलवा, मोहन थाल और मेसू टिक्की सहित अन्य व्यंजनों का भोग लगाया गया। आयोजन के समापन पर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। पूरे कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने उत्साह और श्रद्धा के साथ भाग लिया।

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Author
Rajendra Harsh
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