शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 06:26 PM

ऑर्चिड सेंट्रल स्कूल की फीस वृद्धि और बसों के दस्तावेजों को लेकर अभिभावकों में रोष

जोधपुर। बाईपास रोड स्थित ऑर्चिड सेंट्रल स्कूल की कार्यप्रणाली को लेकर अभिभावकों में नाराजगी सामने आई है। अभिभावकों ने बस फीस में करीब 25 प्रतिशत वृद्धि, स्कूल बसों की फिटनेस और आवश्यक दस्तावेजों की स्थिति तथा फीस जमा कराने के लिए बच्चों पर कथित दबाव बनाने जैसे मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन और संबंधित परिवहन अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। अभिभावकों के अनुसार, पिछले करीब दो वर्षों से बसों के फिटनेस प्रमाणपत्र, पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) और अन्य दस्तावेजों को लेकर स्कूल प्रशासन को फोन और संदेशों के माध्यम से शिकायतें दी जा रही हैं। उनका आरोप है कि इन शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, बसों के दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगी।

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जोधपुर। बाईपास रोड स्थित ऑर्चिड सेंट्रल स्कूल की कार्यप्रणाली को लेकर अभिभावकों में नाराजगी सामने आई है। अभिभावकों ने बस फीस में करीब 25 प्रतिशत वृद्धि, स्कूल बसों की फिटनेस और आवश्यक दस्तावेजों की स्थिति तथा फीस जमा कराने के लिए बच्चों पर कथित दबाव बनाने जैसे मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन और संबंधित परिवहन अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

अभिभावकों के अनुसार, पिछले करीब दो वर्षों से बसों के फिटनेस प्रमाणपत्र, पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) और अन्य दस्तावेजों को लेकर स्कूल प्रशासन को फोन और संदेशों के माध्यम से शिकायतें दी जा रही हैं। उनका आरोप है कि इन शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, बसों के दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगी।

बस सेवा बंद होने से बढ़ी परेशानी

अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रशासन ने बसों की फिटनेस संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए करीब 15 दिनों तक बस सेवा बंद रखने की सूचना दी है। इससे कामकाजी परिवारों के सामने बच्चों के आवागमन की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। अभिभावकों ने मांग की है कि बच्चों की सुरक्षित आवाजाही और नियमित पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए व्यावहारिक व्यवस्था की जाए।

फीस और शैक्षणिक सामग्री पर भी सवाल

अभिभावकों ने फीस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि फीस में वृद्धि से परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उनका आरोप है कि भुगतान में देरी होने पर बच्चों के माध्यम से अभिभावकों पर दबाव बनाया जाता है और कुछ मामलों में परीक्षा में बैठने से रोकने की बात कही जाती है। उन्होंने यूनिफॉर्म, किताबों और कॉपियों की लागत को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की है।

अभिभावकों के मुताबिक, सुबह स्कूल में मरम्मत कार्य के कारण ऑनलाइन कक्षाओं की सूचना दी गई, जबकि बाद में बस सेवा बंद रखने का संदेश भी मिला। इससे अभिभावकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी।

अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग

अभिभावकों ने मांग की है कि स्कूल बसों के फिटनेस प्रमाणपत्र, आरसी, बीमा, परमिट और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच कराई जाए। साथ ही फीस वृद्धि, परिवहन व्यवस्था और शिकायतों के निस्तारण की भी पड़ताल हो।

अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने प्रशासन से तथ्यों की जांच कर नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई करने तथा विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न होने देने की मांग की है।

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Author
Rajendra Harsh
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