जोधपुर में अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण का भंडाफोड़

जोधपुर। प्रदेश में कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत जोधपुर में राज्य एवं जिला पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) टीम ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण के नेटवर्क का पर्दाफाश किया। सुनियोजित डिकॉय ऑपरेशन के दौरान एक निजी नर्सिंगकर्मी को गर्भस्थ शिशु का लिंग बताने के आरोप में रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। आरोपी के कब्जे से पोर्टेबल मोबाइल अल्ट्रासाउंड मशीन, मोबाइल फोन तथा डिकॉय ऑपरेशन के लिए दिए गए 50 हजार रुपये बरामद किए गए। आरोपी को पीसीपीएनडीटी न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

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जोधपुर। प्रदेश में कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत जोधपुर में राज्य एवं जिला पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) टीम ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण के नेटवर्क का पर्दाफाश किया। सुनियोजित डिकॉय ऑपरेशन के दौरान एक निजी नर्सिंगकर्मी को गर्भस्थ शिशु का लिंग बताने के आरोप में रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। आरोपी के कब्जे से पोर्टेबल मोबाइल अल्ट्रासाउंड मशीन, मोबाइल फोन तथा डिकॉय ऑपरेशन के लिए दिए गए 50 हजार रुपये बरामद किए गए। आरोपी को पीसीपीएनडीटी न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर, प्रमुख शासन सचिव (स्वास्थ्य) गायत्री राठौड़, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम, पीसीपीएनडीटी प्रोजेक्ट निदेशक सोनल मीणा, अतिरिक्त निदेशक अंजली अजीत जोरवाल तथा जिला कलक्टर आलोक रंजन के निर्देशन में यह कार्रवाई की गई।

मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम ने बताया कि गिरफ्तार निजी नर्सिंगकर्मी ओमप्रकाश चौधरी लंबे समय से पीसीपीएनडीटी टीम की निगरानी में था। उसके खिलाफ मोटी रकम लेकर गर्भस्थ शिशु का लिंग बताने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के बाद विशेष डिकॉय ऑपरेशन की योजना बनाई गई।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि आरोपी बनाड़ क्षेत्र में सक्रिय था। उसे संदेह न हो, इसलिए प्रतापगढ़ से एक गर्भवती महिला को बुलाकर डिकॉय ऑपरेशन किया गया। आरोपी ने कथित रूप से भ्रूण का लिंग बताने के लिए 50 हजार रुपये मांगे। जैसे ही उसने जांच शुरू की और लिंग संबंधी जानकारी देने की प्रक्रिया अपनाई, पहले से तैनात पीसीपीएनडीटी टीम ने मौके पर दबिश देकर उसे पकड़ लिया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी मोबाइल फोन से जुड़ने वाली अत्याधुनिक हैंडहेल्ड पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड प्रोब का उपयोग कर रहा था। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस तरह के उपकरणों का बिना पंजीकरण और भ्रूण लिंग परीक्षण के लिए उपयोग पूरी तरह अवैध है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि आरोपी यह मशीन कहां से लाया, कब से इस अवैध कारोबार में शामिल था और उसके नेटवर्क में कौन-कौन लोग जुड़े हैं।

जिला पीसीपीएनडीटी समन्वयक सरला दाधीच ने बताया कि पीसीपीएनडीटी अधिनियम, 1994 के तहत गर्भस्थ शिशु का लिंग परीक्षण करना, करवाना या इसमें किसी भी प्रकार की सहायता देना दंडनीय अपराध है। प्रत्येक सोनोग्राफी मशीन का पंजीकरण अनिवार्य है और उसकी जीपीएस आधारित निगरानी की जाती है।

सफल कार्रवाई में जयपुर पीबीआई थाना की निरीक्षक प्रीति चैची, संतोष शर्मा, सब-इंस्पेक्टर द्वारका प्रसाद, सरला दाधीच, महेश कुमार तथा पीबीआई थाना के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मामले की सुनवाई के बाद विशिष्ट अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (पीसीपीएनडीटी एक्ट प्रकरण) ने आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने के आदेश दिए। अब पुलिस और पीसीपीएनडीटी सेल पूरे नेटवर्क की गहन जांच में जुटी है।

 
 
 
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Author
Rajendra Harsh
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