राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी Jodhpur के भीतरी शहर में इस बार होली का पर्व पारंपरिक उत्साह और रंगों की बौछार के साथ धूमधाम से मनाया गया। खासतौर पर नव चौकिया, उम्मेद चौक और पूरबियों का बास क्षेत्र में उत्सव का अलग ही नजारा देखने को मिला। स्थानीय लोगों के साथ-साथ विदेशी मेहमानों ने भी रंगों के इस पर्व का जमकर आनंद उठाया।
भीतरी क्षेत्र स्थित Krishna Mandir में क्षेत्रवासियों द्वारा मंगलवार को परंपरागत तरीके से बड़ा कड़ाव (कुंड) सजाया गया। ढोल-नगाड़ों की थाप और फाग गीतों के बीच श्रद्धा और उल्लास के साथ होली मनाई गई। सुबह से ही लोग मंदिर परिसर में एकत्रित होने लगे थे। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में भाग लिया, वहीं युवाओं ने गुलाल और रंगों से माहौल को और भी रंगीन बना दिया।
विदेशी पर्यटक, जो इन दिनों जोधपुर भ्रमण पर हैं, भी इस उत्सव का हिस्सा बने। उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर गुलाल उड़ाया और पारंपरिक होली गीतों पर नृत्य किया। कई विदेशी मेहमानों ने कहा कि उन्होंने भारत में पहली बार इतनी जीवंत और पारंपरिक होली देखी है। रंगों और आपसी भाईचारे का यह दृश्य उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव रहा।
नव चौकिया क्षेत्र की संकरी गलियां रंगों से सराबोर नजर आईं। हर ओर “होली है” के जयकारे गूंजते रहे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया।
इस तरह जोधपुर के भीतरी शहर में परंपरा, संस्कृति और उत्साह का संगम देखने को मिला, जहां स्थानीय निवासियों और विदेशी मेहमानों ने मिलकर होली को यादगार बना दिया।
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