राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत और निकाय चुनाव पर मांगा शेड्यूल

जोधपुर, 16 जुलाई। राजस्थान में लंबे समय से लंबित पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से कड़ा रुख अपनाते हुए 20 जुलाई तक पूरा चुनावी कार्यक्रम प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने चुनाव प्रक्रिया में हो रही देरी पर नाराजगी भी जताई। यह निर्देश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने स्वयं लोढ़ा एवं अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिए। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने पक्ष रखा। वहीं राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त राजेश्वर सिंह तथा ओबीसी आयोग के सलाहकार वर्चुअल माध्यम से अदालत की कार्यवाही में शामिल हुए।


जोधपुर, 16 जुलाई। राजस्थान में लंबे समय से लंबित पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से कड़ा रुख अपनाते हुए 20 जुलाई तक पूरा चुनावी कार्यक्रम प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने चुनाव प्रक्रिया में हो रही देरी पर नाराजगी भी जताई।

यह निर्देश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने स्वयं लोढ़ा एवं अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिए। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने पक्ष रखा। वहीं राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त राजेश्वर सिंह तथा ओबीसी आयोग के सलाहकार वर्चुअल माध्यम से अदालत की कार्यवाही में शामिल हुए।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से स्पष्ट रूप से पूछा कि चुनाव कराने को लेकर उनका वर्तमान रुख क्या है। अदालत ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के चुनाव समय पर होना आवश्यक है और अनावश्यक विलंब उचित नहीं माना जा सकता।

खंडपीठ ने निर्देश दिए कि अगली सुनवाई से पहले राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग विस्तृत चुनाव कार्यक्रम अदालत के समक्ष पेश करें। इस कार्यक्रम में चुनाव की संभावित तिथियां, वार्डों के आरक्षण और लॉटरी की प्रक्रिया, नामांकन, जांच, नाम वापसी, मतदान, मतगणना तथा अन्य सभी महत्वपूर्ण चरणों का स्पष्ट विवरण शामिल किया जाए।

अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि चुनाव कराने में किसी प्रकार की प्रशासनिक या कानूनी बाधा है तो उसका स्पष्ट उल्लेख किया जाए, ताकि न्यायालय उस पर उचित निर्णय ले सके। कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर अस्पष्टता की स्थिति बनी रहना उचित नहीं है।

मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित की गई है। अब सभी की नजरें राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से पेश किए जाने वाले चुनावी कार्यक्रम पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इस सुनवाई के बाद पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की दिशा और समय-सीमा को लेकर स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो सकती है।

 
 
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Author
Rajendra Harsh
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