आयुर्वेद विश्वविद्यालय में गर्भसंस्कार विषयक तीन दिवसीय ऑफलाइन प्रशिक्षण का शुभारंभ

जोधपुर, 23 जुलाई। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर एवं संवर्धिनी न्यास, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में संचालित गर्भसंस्कार सेमी-ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स के अंतर्गत तीन दिवसीय ऑफलाइन प्रशिक्षण सत्र का गुरुवार को शुभारंभ हुआ। प्रशिक्षण में असम, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से 20 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर स्त्री रोग एवं प्रसूति तंत्र विभाग, पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद द्वारा कुलगुरु प्रो. (वैद्य) गोविन्द सहाय शुक्ल के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। इससे पहले कोर्स के तहत 12 दिवसीय ऑनलाइन व्याख्यान श्रृंखला सफलतापूर्वक आयोजित की जा चुकी है।

WhatsApp Image 2026-07-23 at 1.41.43 PM (1)-3Gc3BJP8pF.jpg

जोधपुर, 23 जुलाई। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर एवं संवर्धिनी न्यास, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में संचालित गर्भसंस्कार सेमी-ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स के अंतर्गत तीन दिवसीय ऑफलाइन प्रशिक्षण सत्र का गुरुवार को शुभारंभ हुआ। प्रशिक्षण में असम, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से 20 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।

कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर स्त्री रोग एवं प्रसूति तंत्र विभाग, पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद द्वारा कुलगुरु प्रो. (वैद्य) गोविन्द सहाय शुक्ल के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। इससे पहले कोर्स के तहत 12 दिवसीय ऑनलाइन व्याख्यान श्रृंखला सफलतापूर्वक आयोजित की जा चुकी है।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो. गोविन्द सहाय शुक्ल ने कहा कि गर्भसंस्कार भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जिसका उद्देश्य केवल स्वस्थ शिशु का जन्म नहीं, बल्कि संस्कारवान, बुद्धिमान और सशक्त भावी पीढ़ी का निर्माण करना है। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान माता के आहार, व्यवहार और विचारों का सीधा प्रभाव गर्भस्थ शिशु के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास पर पड़ता है, इसलिए वर्तमान समय में गर्भसंस्कार की प्रासंगिकता और बढ़ गई है।

मुख्य अतिथि वाराणसी के प्रो. एल.बी. सिंह ने आयुर्वेद के पारंपरिक सिद्धांतों और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के समन्वय पर जोर दिया। कुलसचिव प्रो. गोविन्द प्रसाद गुप्ता ने कहा कि गर्भसंस्कार भारतीय परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को समग्र रूप से सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कोर्स समन्वयक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. ए. नीलिमा ने बताया कि इस राष्ट्रीय स्तर के सेमी-ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स को विभिन्न राज्यों से अच्छा प्रतिसाद मिला है। ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को गर्भसंस्कार के सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों पहलुओं की जानकारी दी जा रही है।

प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में संवर्धिनी न्यास की काउंसलर डॉ. श्वेता डांगरे ने स्ट्रेस मैनेजमेंट, क्वांटम मैकेनिक्स इन प्रेगनेंसी तथा ईएफटी (इमोशनल फ्रीडम टेक्नीक) के सिद्धांतों एवं व्यावहारिक प्रदर्शन पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने गर्भवती महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच और भावनात्मक संतुलन के महत्व पर प्रकाश डाला।

द्वितीय सत्र में आंध्र प्रदेश के इंफर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ. आंडल भास्कर ने वॉम्ब कम्युनिकेशन विषय पर व्याख्यान देते हुए गर्भस्थ शिशु से सकारात्मक संवाद और मातृ भावनाओं के वैज्ञानिक एवं आयुर्वेदिक महत्व को विस्तार से समझाया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागी और स्नातकोत्तर विद्यार्थी उपस्थित रहे।

 
 
 
0
Author
Rajendra Harsh
Author
Rajendra Harsh

Write a Response