बालोतरा के जूती कारीगर को 6.78 करोड़ रुपये का जीएसटी रिकवरी नोटिस

बालोतरा, 30 जुलाई। राजस्थान के बालोतरा जिले के गुड़ामालानी जीनगर मोहल्ला निवासी जूती कारीगर जितेंद्र कुमार जीनगर को 6 करोड़ 78 लाख 97 हजार 357 रुपये का जीएसटी रिकवरी नोटिस मिलने से हड़कंप मच गया। मामला सामने आने के बाद पीड़ित परिवार ने पहचान संबंधी दस्तावेजों के दुरुपयोग और साइबर धोखाधड़ी की आशंका जताई है। परिवार का आरोप है कि संभवतः किसी फाइनेंस कंपनी या अन्य संस्थान से व्यक्तिगत दस्तावेजों का डेटा लीक हुआ, जिसका फायदा उठाकर यह फर्जीवाड़ा किया गया। पीड़ित ने संबंधित विभागों से मामले की निष्पक्ष जांच कर फर्जी फर्म को निरस्त करने, बैंक खातों पर लगी रोक हटाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।


बालोतरा, 30 जुलाई। राजस्थान के बालोतरा जिले के गुड़ामालानी जीनगर मोहल्ला निवासी जूती कारीगर जितेंद्र कुमार जीनगर को 6 करोड़ 78 लाख 97 हजार 357 रुपये का जीएसटी रिकवरी नोटिस मिलने से हड़कंप मच गया। मामला सामने आने के बाद पीड़ित परिवार ने पहचान संबंधी दस्तावेजों के दुरुपयोग और साइबर धोखाधड़ी की आशंका जताई है।

जानकारी के अनुसार, तमिलनाडु वाणिज्यिक कर विभाग के कृष्णगिरी-2 असेसमेंट सर्किल के सहायक आयुक्त की ओर से 5 मई 2026 को जारी नोटिस में बताया गया कि श्री शिवम एक्सपोर्टर्स नामक फर्म पर वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2019-20 के दौरान कुल 6.78 करोड़ रुपये से अधिक का जीएसटी बकाया है। नोटिस में जीएसटी और पैन नंबर के आधार पर संबंधित बैंक खातों, एफडी तथा ओवरड्राफ्ट खातों को तत्काल फ्रीज करने के निर्देश भी दिए गए।

पीड़ित जितेंद्र कुमार का कहना है कि वह एक साधारण जूती कारीगर हैं और उन्होंने कभी तमिलनाडु में कोई कंपनी संचालित नहीं की। न ही उन्होंने किसी को अपने दस्तावेज कंपनी पंजीकरण के लिए उपलब्ध कराए। जब उन्हें बैंक संबंधी समस्या का पता चला और वे शिकायत करने पहुंचे, तब इस भारी-भरकम जीएसटी नोटिस की जानकारी मिली।

प्रारंभिक पड़ताल में आशंका जताई जा रही है कि किसी अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह ने पीड़ित के पैन कार्ड और अन्य पहचान दस्तावेजों का दुरुपयोग कर तमिलनाडु के कृष्णगिरी पते पर फर्जी फर्म पंजीकृत कर दी। इसके बाद उस फर्म के नाम पर कारोबारी लेनदेन दिखाकर भारी टैक्स देनदारी उत्पन्न हो गई।

परिवार का आरोप है कि संभवतः किसी फाइनेंस कंपनी या अन्य संस्थान से व्यक्तिगत दस्तावेजों का डेटा लीक हुआ, जिसका फायदा उठाकर यह फर्जीवाड़ा किया गया। पीड़ित ने संबंधित विभागों से मामले की निष्पक्ष जांच कर फर्जी फर्म को निरस्त करने, बैंक खातों पर लगी रोक हटाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला पहचान की चोरी (आईडेंटिटी थेफ्ट) और दस्तावेजों के दुरुपयोग से जुड़े गंभीर साइबर अपराधों की ओर संकेत करता है, जिसकी गहन जांच आवश्यक है।

 
 
 
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Author
Rajendra Harsh
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