मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 03:47 AM

आयुर्वेद विश्वविद्यालय में छह दिवसीय CME कार्यक्रम का शुभारंभ

जोधपुर, 26 अक्टूबर। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (PGIA) में सोमवार को छह दिवसीय सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। 26 से 31 अक्टूबर तक आयोजित इन कार्यक्रमों का संचालन द्रव्यगुण एवं शल्यतंत्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आयुर्वेद के शास्त्रीय ज्ञान, आधुनिक चिकित्सा तकनीकों और नवीन अनुसंधान के बीच समन्वय स्थापित करना है। कुलगुरु प्रो. शुक्ल ने कहा कि आयुर्वेद की समृद्ध शास्त्रीय परंपरा को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान एवं प्रमाण-आधारित चिकित्सा पद्धतियों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। वहीं, प्रो. मानसी देशपांडे ने अग्र्य औषधियों की तार्किकता और चिकित्सकीय महत्ता को समझने पर जोर दिया। प्रो. रबि नारायण आचार्य ने आयुष अनुसंधान एवं अनुक्त द्रव्यों के वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता बताई।

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  1. जोधपुर, 26 अक्टूबर। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (PGIA) में सोमवार को छह दिवसीय सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। 26 से 31 अक्टूबर तक आयोजित इन कार्यक्रमों का संचालन द्रव्यगुण एवं शल्यतंत्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आयुर्वेद के शास्त्रीय ज्ञान, आधुनिक चिकित्सा तकनीकों और नवीन अनुसंधान के बीच समन्वय स्थापित करना है।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल ने की। मुख्य अतिथि गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जामनगर की कुलपति प्रो. डॉ. मानसी देशपांडे रहीं। विशिष्ट अतिथियों में केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) के महानिदेशक प्रो. डॉ. रबि नारायण आचार्य तथा राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर के प्रो. पी. हेमंता कुमार और प्रो. सुमन शर्मा शामिल रहे।

    आयुर्वेद को वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़ने पर जोर

    कुलगुरु प्रो. शुक्ल ने कहा कि आयुर्वेद की समृद्ध शास्त्रीय परंपरा को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान एवं प्रमाण-आधारित चिकित्सा पद्धतियों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। वहीं, प्रो. मानसी देशपांडे ने अग्र्य औषधियों की तार्किकता और चिकित्सकीय महत्ता को समझने पर जोर दिया। प्रो. रबि नारायण आचार्य ने आयुष अनुसंधान एवं अनुक्त द्रव्यों के वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता बताई।

    औषधियों और आधुनिक शल्य तकनीकों पर व्याख्यान

    द्रव्यगुण विभाग के सत्र में प्रो. आचार्य ने आयुष अनुसंधान एवं अनुक्त द्रव्यों पर व्याख्यान दिया। प्रो. देशपांडे ने चरक, सुश्रुत और वाग्भट्ट संहिताओं में वर्णित अग्र्य औषधियों की अवधारणा और उनके चिकित्सकीय महत्व की जानकारी दी।

    शल्यतंत्र विभाग के सत्र में प्रो. सुमन शर्मा ने डायग्नोस्टिक रेडियोलॉजी, आधुनिक इमेजिंग तकनीकों और अस्थिभंग के सामान्य प्रबंधन पर व्याख्यान दिया। प्रो. पी. हेमंता कुमार ने क्षारकर्म के नवीन विकास के साथ गुदा एवं मलाशय संबंधी रोगों में लेजर तकनीक की उपयोगिता पर चर्चा की तथा प्रायोगिक प्रदर्शन भी किया।

    विभिन्न राज्यों के प्रतिभागी ले रहे हिस्सा

    कार्यक्रमों में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षक, चिकित्सक और शोधार्थी भाग ले रहे हैं। दोनों CME कार्यक्रमों के लिए 30-30 प्रतिभागियों का चयन किया गया है। आयोजन प्रो. चंदन सिंह और प्रो. राजेश गुप्ता के दिशा-निर्देशन में हो रहा है। आगामी सत्रों में विशेषज्ञ व्याख्यान, प्रायोगिक प्रदर्शन और चिकित्सकीय विषयों पर चर्चा होगी। इससे प्रतिभागियों को नवीन अनुसंधान, आधुनिक तकनीकों और व्यावहारिक कौशल की जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

     
     
     
     
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Author
Rajendra Harsh
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