आयुर्वेद विश्वविद्यालय में नाड़ी परीक्षण सर्टिफिकेट कोर्स की ऑफलाइन ट्रेनिंग शुरू
- Posted on 17 अगस्त 2026
- सामान्य समाचार
- By Rajendra Harsh
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जोधपुर, 17 अगस्त। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर के स्नातकोत्तर क्रिया शारीर विभाग द्वारा आयोजित एक माह के सेमी-ऑनलाइन नाड़ी परीक्षण प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम के अंतर्गत छह दिवसीय ऑफलाइन हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम का सोमवार को शुभारंभ हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से आए 32 प्रतिभागी इस विशेष प्रशिक्षण में भाग ले रहे हैं। पाठ्यक्रम में कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान सहित कई राज्यों के प्रतिभागी शामिल हैं। एक माह के इस सेमी-ऑनलाइन पाठ्यक्रम में ऑनलाइन सैद्धांतिक अध्ययन के साथ छह दिवसीय ऑफलाइन प्रशिक्षण भी शामिल है, जिससे प्रतिभागियों को विषय का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो सके।
जोधपुर, 17 अगस्त। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर के स्नातकोत्तर क्रिया शारीर विभाग द्वारा आयोजित एक माह के सेमी-ऑनलाइन नाड़ी परीक्षण प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम के अंतर्गत छह दिवसीय ऑफलाइन हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम का सोमवार को शुभारंभ हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से आए 32 प्रतिभागी इस विशेष प्रशिक्षण में भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। पाठ्यक्रम समन्वयक प्रोफेसर (डॉ.) दिनेश चंद्र शर्मा ने स्वागत उद्बोधन देते हुए पाठ्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्य की जानकारी दी। इसके बाद प्रतिभागियों ने अपना परिचय प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविन्द सहाय शुक्ल ने की। अपने संबोधन में उन्होंने महर्षि चरक के आयुर्वेद में अतुलनीय योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को वर्तमान समय के संदर्भ में समझना और उसका नियमित अभ्यास करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नाड़ी परीक्षा रोगी परीक्षण और रोग निदान की एक महत्वपूर्ण विधा है तथा इसके निरंतर अभ्यास और व्यावहारिक प्रशिक्षण से चिकित्सक अधिक दक्षता प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने प्रतिभागियों को नाड़ी परीक्षण की इस प्राचीन विद्या को गंभीरता से सीखने और इसे आधुनिक चिकित्सा परिप्रेक्ष्य में उपयोगी बनाने का संदेश दिया। साथ ही प्रशिक्षण कार्यक्रम और प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
प्रशिक्षण सत्र में महाराष्ट्र के सोलापुर से आईं नाड़ी विशेषज्ञ प्रोफेसर (डॉ.) शिल्पा यर्मे ने प्रतिभागियों को नाड़ी परीक्षण की बारीकियों, नाड़ी के विभिन्न आयामों तथा रोग निदान में इसकी भूमिका के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्रत्यक्ष प्रदर्शन और व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से नाड़ी परीक्षण की विभिन्न तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान किया।
पाठ्यक्रम में कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान सहित कई राज्यों के प्रतिभागी शामिल हैं। एक माह के इस सेमी-ऑनलाइन पाठ्यक्रम में ऑनलाइन सैद्धांतिक अध्ययन के साथ छह दिवसीय ऑफलाइन प्रशिक्षण भी शामिल है, जिससे प्रतिभागियों को विषय का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो सके।
कार्यक्रम में प्रो. (डॉ.) महेंद्र कुमार शर्मा, प्रो. (डॉ.) गोविंद प्रसाद गुप्ता, प्रो. (डॉ.) देवेंद्र सिंह चाहर, प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार अदलखा, डॉ. राकेश कुमार शर्मा, डॉ. विजय पाल त्यागी सहित संकाय सदस्य, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे। अंत में प्राचार्य एवं निदेशक प्रो. (डॉ.) चंदन सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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