आयुर्वेद विश्वविद्यालय में इंस्टीट्यूशनल रिसर्च कमिटी की बैठक

जोधपुर, 19 अगस्त। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय में बुधवार को संस्थागत अनुसंधान समिति (आईआरसी) की बैठक आयोजित की गई। बैठक के शुभारंभ अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर वैद्य गोविन्द सहाय शुक्ल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। बैठक में एमडी/एमएस आयुर्वेद एवं पीएचडी शोधार्थियों के शोध प्रस्तावों के सिनॉप्सिस प्रस्तुतिकरण और शोध कार्यों की समीक्षा को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। कुलगुरु प्रोफेसर वैद्य गोविन्द सहाय शुक्ल ने कहा कि विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण एवं टेक्नोलॉजी आधारित उपयोगी अनुसंधान को बढ़ावा देना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि शोध कार्य केवल अकादमिक उपलब्धि तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके परिणाम समाज और चिकित्सा क्षेत्र के लिए उपयोगी होने चाहिए।

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जोधपुर, 19 अगस्त। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय में बुधवार को संस्थागत अनुसंधान समिति (आईआरसी) की बैठक आयोजित की गई। बैठक के शुभारंभ अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर वैद्य गोविन्द सहाय शुक्ल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। बैठक में एमडी/एमएस आयुर्वेद एवं पीएचडी शोधार्थियों के शोध प्रस्तावों के सिनॉप्सिस प्रस्तुतिकरण और शोध कार्यों की समीक्षा को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।

कुलगुरु प्रोफेसर वैद्य गोविन्द सहाय शुक्ल ने कहा कि विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण एवं टेक्नोलॉजी आधारित उपयोगी अनुसंधान को बढ़ावा देना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि शोध कार्य केवल अकादमिक उपलब्धि तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके परिणाम समाज और चिकित्सा क्षेत्र के लिए उपयोगी होने चाहिए। शोधार्थियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ शोध विषय का चयन करते हुए अनुसंधान की गुणवत्ता और प्रासंगिकता पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

बैठक में अखिल भारतीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के शोध सलाहकार डॉ. अनिल कुमार बाह्य विषय विशेषज्ञ के रूप में शामिल हुए। इसके अलावा आईआरसी अध्यक्ष प्रो. चंदन सिंह तथा आईआरसी सदस्य सचिव डॉ. देवेंद्र सिंह चाहर मौजूद रहे। विश्वविद्यालय के सभी विभागाध्यक्षों ने आईआरसी सदस्यों के रूप में बैठक में सहभागिता की।

आईआरसी सदस्य सचिव प्रोफेसर देवेन्द्र चाहर ने बताया कि 18 से 21 अगस्त तक एमडी आयुर्वेद एवं पीएचडी शोधार्थियों द्वारा कुल 98 शोध सिनॉप्सिस प्रस्तुत किए जाएंगे। शोधार्थी समिति के समक्ष अपने प्रस्तावित शोध विषय, उद्देश्य, कार्यविधि तथा अपेक्षित परिणामों के बारे में विस्तार से प्रस्तुतिकरण करेंगे।

समिति द्वारा प्रस्तुत शोध प्रस्तावों का अकादमिक एवं वैज्ञानिक गुणवत्ता के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। साथ ही शोधार्थियों को आवश्यक सुझाव और मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाएगा, ताकि उनके शोध कार्य वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप और अधिक प्रभावी बनाए जा सकें।

विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि संस्थागत अनुसंधान समिति के माध्यम से शोध प्रस्तावों को वैज्ञानिक कसौटियों के अनुरूप तैयार करने और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को प्रोत्साहित करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। टेक्नोलॉजी आधारित और समाजोपयोगी शोध को बढ़ावा देकर आयुर्वेद चिकित्सा क्षेत्र में नए अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करना विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं में शामिल है।

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Author
Rajendra Harsh
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