जोधपुर रेलवे स्टेशन पर 'अमाउंट कार्ड' गैंग का भंडाफोड़
- Posted on 2 जुलाई 2026
- जोधपुर
- By Rajendra Harsh
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जोधपुर। जोधपुर जीआरपी ने रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को पुलिस अधिकारी बनकर ठगने वाले अंतरराज्यीय "अमाउंट कार्ड" गैंग का पर्दाफाश करते हुए तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरोह के सदस्य यात्रियों को सोना और नकदी लेकर यात्रा करने पर पुलिस कार्रवाई का डर दिखाते थे तथा "अमाउंट कार्ड" बनवाने के नाम पर उनका कीमती सामान लेकर फरार हो जाते थे। गिरफ्तार आरोपियों में दिल्ली निवासी पुष्पेंद्र बसंतवानी, बिहार के किशनगंज निवासी अपुजर आलम और पाली निवासी मिठू सिंह शामिल हैं। पूछताछ में तीनों ने वारदात करना स्वीकार कर लिया। पुलिस ने ठगी गए सोने का बिस्किट का हिस्सा भी बरामद कर लिया है।
जोधपुर। जोधपुर जीआरपी ने रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को पुलिस अधिकारी बनकर ठगने वाले अंतरराज्यीय "अमाउंट कार्ड" गैंग का पर्दाफाश करते हुए तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरोह के सदस्य यात्रियों को सोना और नकदी लेकर यात्रा करने पर पुलिस कार्रवाई का डर दिखाते थे तथा "अमाउंट कार्ड" बनवाने के नाम पर उनका कीमती सामान लेकर फरार हो जाते थे।
जीआरपी थाना जोधपुर में पश्चिम बंगाल निवासी ज्वैलरी कारीगर भावेश धोलाई ने 7 मई 2026 को मामला दर्ज कराया था। रिपोर्ट के अनुसार वह प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर पश्चिम बंगाल जाने वाली ट्रेन का इंतजार कर रहा था। इसी दौरान दो युवकों ने बातचीत शुरू की और उसके पास मौजूद 15 ग्राम सोने का बिस्किट, मोबाइल, तीन हजार रुपये नकद तथा आधार कार्ड की जानकारी हासिल कर ली। बाद में कथित पुलिस अधिकारी बनकर आए एक व्यक्ति ने "अमाउंट कार्ड" बनवाने का झांसा दिया और सारा सामान लेकर फरार हो गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर थानाधिकारी मुक्ता पारीक के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, रेलवे स्टेशनों पर निगरानी और अपराधियों के पुराने रिकॉर्ड का विश्लेषण कर गिरोह के तीन सदस्यों की पहचान की।
गिरफ्तार आरोपियों में दिल्ली निवासी पुष्पेंद्र बसंतवानी, बिहार के किशनगंज निवासी अपुजर आलम और पाली निवासी मिठू सिंह शामिल हैं। पूछताछ में तीनों ने वारदात करना स्वीकार कर लिया। पुलिस ने ठगी गए सोने का बिस्किट का हिस्सा भी बरामद कर लिया है। आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य बंगाली, बिहारी और राजस्थानी सहित विभिन्न भाषाओं में बातचीत कर दूसरे राज्यों के मजदूरों, कारीगरों और व्यापारियों को निशाना बनाते थे। पहले एक सदस्य दोस्ती कर पीड़ित के पास मौजूद नकदी और कीमती सामान की जानकारी जुटाता था। इसके बाद अन्य सदस्य खुद को यात्री बताकर विश्वास जीतते और अंत में एक आरोपी पुलिस, जीएसटी या रेलवे अधिकारी बनकर "अमाउंट कार्ड" बनवाने का झांसा देकर सोना, नकदी और मोबाइल लेकर फरार हो जाता था।
जीआरपी ने यात्रियों से अपील की है कि रेलवे स्टेशन पर किसी भी अनजान व्यक्ति की बातों में न आएं। पुलिस या अन्य अधिकारी बनकर कोई व्यक्ति यदि अमाउंट कार्ड, लाइसेंस या अन्य किसी बहाने से नकदी अथवा कीमती सामान मांगे तो तत्काल रेलवे पुलिस को सूचना दें।
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