मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 06:59 AM

माचिया जैविक उद्यान की 14 वर्षीय शेरनी का निधन

जोधपुर, 18 सितंबर। माचिया जैविक उद्यान, जोधपुर की एकमात्र शेरनी का शुक्रवार सुबह 14 वर्ष की आयु में निधन हो गया। शेरनी के निधन से उद्यान प्रशासन और वन्यजीव प्रेमियों में शोक की लहर है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि शेरनी का शेरों के संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रम में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। शेरनी के निधन के बाद नियमानुसार पशु चिकित्सकों के बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम की कार्रवाई की गई। पोस्टमार्टम के दौरान वन विभाग के अधिकारियों के साथ पुलिस और राजस्व विभाग के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। कार्रवाई पूरी होने के बाद अधिकारियों की मौजूदगी में माचिया वन खंड में शेरनी का नियमानुसार दाह संस्कार किया गया।

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जोधपुर, 18 सितंबर। माचिया जैविक उद्यान, जोधपुर की एकमात्र शेरनी का शुक्रवार सुबह 14 वर्ष की आयु में निधन हो गया। शेरनी के निधन से उद्यान प्रशासन और वन्यजीव प्रेमियों में शोक की लहर है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि शेरनी का शेरों के संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रम में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

शेरनी के निधन के बाद नियमानुसार पशु चिकित्सकों के बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम की कार्रवाई की गई। पोस्टमार्टम के दौरान वन विभाग के अधिकारियों के साथ पुलिस और राजस्व विभाग के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। कार्रवाई पूरी होने के बाद अधिकारियों की मौजूदगी में माचिया वन खंड में शेरनी का नियमानुसार दाह संस्कार किया गया।

उप वन संरक्षक वन्यजीव उदा राम सियोल ने बताया कि उक्त शेरनी को 18 मार्च 2016 को गुजरात के जूनागढ़ स्थित शक्करबाग जंतुआलय से माचिया जैविक उद्यान लाया गया था। उद्यान में आने के बाद शेरनी ने अलग-अलग समय पर तीन शावकों को जन्म दिया। इन सभी शावकों का पालन-पोषण माचिया जैविक उद्यान में ही हुआ।

वन विभाग के अनुसार, वर्तमान में माचिया जैविक उद्यान में मौजूद एकमात्र शेर भी इसी शेरनी का पुत्र है। इस लिहाज से शेरनी ने उद्यान में शेरों की संख्या बढ़ाने, संरक्षण और प्रजनन की दिशा में अहम भूमिका निभाई।

पोस्टमार्टम और दाह संस्कार की कार्रवाई के दौरान पशु चिकित्सकों की टीम, उप वन संरक्षक, सहायक वन संरक्षक, क्षेत्रीय वन अधिकारी सहित माचिया जैविक उद्यान के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। इसके अलावा पुलिस विभाग से एएसआई और राजस्व विभाग से आरआई सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारियों ने भी आवश्यक प्रक्रिया में भाग लिया।

वन विभाग ने बताया कि शेरनी की देखभाल लंबे समय से उद्यान में की जा रही थी। उसके निधन के बाद उद्यान में मौजूद शेरों की स्थिति और भविष्य की संरक्षण व्यवस्था पर भी विभाग द्वारा आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

 
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Author
Rajendra Harsh
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