पर्वतासन का विश्व कीर्तिमान स्थापित

जोधपुर। राष्ट्रीय युवा दिवस के पावन अवसर पर डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई। विश्वविद्यालय के माननीय कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल की गरिमामयी उपस्थिति एवं प्रेरक मार्गदर्शन में पर्वतासन का विश्व कीर्तिमान सफलतापूर्वक स्थापित किया गया।

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राष्ट्रीय युवा दिवस पर आयुर्वेद विश्वविद्यालय में पर्वतासन का विश्व कीर्तिमान स्थापित

जोधपुर। राष्ट्रीय युवा दिवस के पावन अवसर पर डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई। विश्वविद्यालय के माननीय कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल की गरिमामयी उपस्थिति एवं प्रेरक मार्गदर्शन में पर्वतासन का विश्व कीर्तिमान सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। यह आयोजन युवाओं को योग, अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति प्रेरित करने की दिशा में एक सशक्त संदेश के रूप में सामने आया।

कार्यक्रम के समन्वयक एवं यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ नेचुरोपैथी के प्राचार्य डॉ. चंद्रभान शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर युवाओं में शारीरिक, मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से इस सामूहिक योग आयोजन की योजना बनाई गई। कुलगुरु महोदय के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के आयुर्वेद, योग एवं नेचुरोपैथी, होम्योपैथी तथा आयुर्वेद बी.एस.सी. नर्सिंग संकाय के लगभग एक हजार छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

डॉ. शर्मा ने बताया कि यह विश्व कीर्तिमान योगा बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी योग गुरु राकेश भारद्वाज की वर्ल्ड रिकॉर्ड स्कीम की सभी निर्धारित गाइडलाइंस का पूर्ण रूप से पालन करते हुए स्थापित किया गया। आयोजन के दौरान समय, संख्या, एकरूपता और तकनीकी मानकों का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे रिकॉर्ड को आधिकारिक मान्यता प्राप्त हो सके।

इस अवसर पर कुलगुरु प्रोफेसर गोविंद सहाय शुक्ल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि योग भारत की प्राचीन परंपरा है, जो न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मन और आत्मा को भी सशक्त बनाता है। उन्होंने युवाओं से योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के समस्त संकाय सदस्य, अधिकारीगण एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे। सभी ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे विश्वविद्यालय और विद्यार्थियों के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया।

 
 
 
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Author
Rajendra Harsh
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