एन.आई. एक्ट प्रकरणों के लिए आयोजित विशेष लोक अदालत में कुल 239 प्रकरणों का निस्तारण

जोधपुर। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली एवं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार शनिवार को जोधपुर महानगर न्यायक्षेत्र में धारा 138 एनआई एक्ट (चेक अनादरण) से संबंधित लंबित एवं प्रि-लिटिगेशन मामलों के निस्तारण के लिए विशेष लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस विशेष लोक अदालत में कुल 239 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया तथा करोड़ों रुपये की अवार्ड राशि पारित की गई। यह विशेष लोक अदालत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जोधपुर महानगर के अध्यक्ष एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश दिनेश त्यागी की अध्यक्षता में आयोजित हुई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राकेश रामावत ने बताया कि चेक अनादरण से जुड़े मामलों के आपसी समझौते के आधार पर निस्तारण के लिए एक विशेष बैंच का गठन किया गया था।

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जोधपुर। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली एवं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार शनिवार को जोधपुर महानगर न्यायक्षेत्र में धारा 138 एनआई एक्ट (चेक अनादरण) से संबंधित लंबित एवं प्रि-लिटिगेशन मामलों के निस्तारण के लिए विशेष लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस विशेष लोक अदालत में कुल 239 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया तथा करोड़ों रुपये की अवार्ड राशि पारित की गई।

यह विशेष लोक अदालत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जोधपुर महानगर के अध्यक्ष एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश दिनेश त्यागी की अध्यक्षता में आयोजित हुई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राकेश रामावत ने बताया कि चेक अनादरण से जुड़े मामलों के आपसी समझौते के आधार पर निस्तारण के लिए एक विशेष बैंच का गठन किया गया था। इस बैंच के अध्यक्ष सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश सिद्धेश्वर पुरी तथा सदस्य अधिवक्ता एवं डिप्टी चीफ एलएडीसी महेन्द्र सिंह गहलोत को नियुक्त किया गया।

सचिव रामावत के अनुसार, विशेष लोक अदालत के समक्ष जोधपुर महानगर न्यायक्षेत्र के न्यायालयों में लंबित 10,593 राजीनामा योग्य प्रकरण तथा प्रि-लिटिगेशन के 704 मामले प्रस्तुत किए गए। इस प्रकार कुल 11,297 मामलों पर विचार किया गया, जिनमें से पक्षकारों की सहमति और समझौते के आधार पर कई मामलों का समाधान कराया गया।

विशेष लोक अदालत के दौरान न्यायालयों में लंबित 238 मामलों का समझौते के आधार पर निस्तारण किया गया। इन मामलों में कुल 5,23,72,806.93 रुपये की अवार्ड राशि पारित की गई। इसके अलावा प्रि-लिटिगेशन स्तर पर भी एक प्रकरण का समाधान हुआ। इस तरह कुल 239 मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया।

विशेष रूप से उल्लेखनीय यह रहा कि लोक अदालत के माध्यम से 10 वर्ष या उससे अधिक समय से लंबित 17 मामलों का भी समाधान कराया गया। इससे न केवल पक्षकारों को शीघ्र न्याय मिला, बल्कि वर्षों से लंबित विवादों का भी अंत हुआ।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने कहा कि लोक अदालतें न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ कम करने के साथ-साथ पक्षकारों को कम समय, कम खर्च और आपसी सहमति से विवादों का समाधान उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम हैं। प्राधिकरण ने भविष्य में भी अधिक से अधिक लोगों से लोक अदालतों का लाभ उठाने की अपील की है।

 
 
 
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Author
Rajendra Harsh
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