सिंदूर खेला के साथ दुर्गा पूजा अनुष्ठान संपन्न
- Posted on 21 अक्टूबर 2026
- जोधपुर
- By Rajendra Harsh
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जोधपुर। बंगाली समाज की ओर से कुड़ी भगतासनी हाउसिंग बोर्ड के सेक्टर-9 स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आयोजित दुर्गा पूजा अनुष्ठान बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कोलकाता से आए पंडित के सान्निध्य में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूर खेला और मां दुर्गा को भावपूर्ण विदाई दी। बंगाली समाज के प्रवक्ता सुमन विश्वास ने बताया कि बुधवार सुबह 10 बजे दशमी पूजा, 11 बजे पुष्पांजलि तथा दोपहर 1 बजे दर्पण विसर्जन का कार्यक्रम हुआ। दर्पण विसर्जन की परंपरा के तहत मां दुर्गा के मुख को दर्पण में देखकर विधि-विधान से अनुष्ठान संपन्न किया गया। इसके बाद देवी बोरोन एवं विसर्जन कार्यक्रम आयोजित हुआ।
जोधपुर। बंगाली समाज की ओर से कुड़ी भगतासनी हाउसिंग बोर्ड के सेक्टर-9 स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आयोजित दुर्गा पूजा अनुष्ठान बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कोलकाता से आए पंडित के सान्निध्य में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूर खेला और मां दुर्गा को भावपूर्ण विदाई दी।
बंगाली समाज के प्रवक्ता सुमन विश्वास ने बताया कि बुधवार सुबह 10 बजे दशमी पूजा, 11 बजे पुष्पांजलि तथा दोपहर 1 बजे दर्पण विसर्जन का कार्यक्रम हुआ। दर्पण विसर्जन की परंपरा के तहत मां दुर्गा के मुख को दर्पण में देखकर विधि-विधान से अनुष्ठान संपन्न किया गया। इसके बाद देवी बोरोन एवं विसर्जन कार्यक्रम आयोजित हुआ।
इस अवसर पर महिलाओं ने सफेद और लाल किनारी वाली पारंपरिक साड़ियां पहनकर सिंदूर खेला। महिलाओं ने पान के पत्तों से मां दुर्गा का वरण कर उनके गालों पर सिंदूर लगाया और आशीर्वाद लिया। इसके बाद एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य एवं अपने सुहाग की सुख-समृद्धि की कामना की। महिलाओं ने मां दुर्गा सहित गणेश, लक्ष्मी, सरस्वती और कार्तिकेय को भी भावपूर्ण विदाई दी।
बंगाली समाज में मां दुर्गा को बेटी के रूप में पूजने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा अपने परिवार के साथ मायके आती हैं और पूजा के बाद ससुराल कैलाश लौट जाती हैं। इसी भाव के साथ महिलाओं ने मुस्कुराहट और नम आंखों से मां को विदा किया।
कार्यक्रम में धुनुची नृत्य, बंगाल के प्रसिद्ध ढाक की थाप और आरती ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। महिलाओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई तथा शांति जल ग्रहण किया। समाज के लोगों ने मां दुर्गा की इको-फ्रेंडली प्रतिमा सहित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का उम्मेद सागर जलाशय में विसर्जन किया। इस दौरान जयकारों और उलू ध्वनि से वातावरण गूंज उठा। विसर्जन के बाद समाजबंधुओं ने गुलाल लगाकर, मिठाइयां बांटकर और स्नेह मिलन के साथ दुर्गा उत्सव का समापन किया।
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