जोधपुर, 30 अगस्त। शहर के प्रतिष्ठित भरतनाट्यम संस्थान शिवम् नाट्यालय में रविवार को प्रतिभाशाली नृत्यांगना दिव्यांका कुमारी का 67वां भव्य अरंगेत्रम सम्पन्न हुआ। वर्षों की कठिन साधना, अनुशासन और समर्पण के बाद दिव्यांका ने भरतनाट्यम की शास्त्रीय परंपरा के अनुरूप अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। शिवम् नाट्यालय वर्ष 1999 से जोधपुर का प्रथम भरतनाट्यम संस्थान होने का गौरव रखता है।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक पुष्पांजलि से हुई। इसके बाद दिव्यांका ने क्रमशः अल्लारिपु, जातिस्वरम, शब्दम, वर्णम, पदम, तिल्लाना और मंगलम की प्रस्तुतियां दीं। प्रत्येक प्रस्तुति में उनके भाव-भंगिमा, लय, ताल और नृत्य की तकनीकी बारीकियों पर मजबूत पकड़ देखने को मिली। उनकी प्रस्तुतियों को दर्शकों ने तालियों की गूंज के साथ सराहा।
कार्यक्रम में नृत्य और संगीत का सुंदर समन्वय देखने को मिला। विभिन्न प्रस्तुतियों में नटई, हेमावती, राग माल्लिका, रेवती और शिवरंजनी जैसे रागों का प्रयोग किया गया। वहीं आदि तालम, चतुरस एकम, रूपक तालम और मिश्र चापु जैसे तालों ने प्रस्तुतियों को और प्रभावशाली बनाया। दिव्यांका ने अपनी भावपूर्ण अभिव्यक्ति और लयबद्ध नृत्य से भरतनाट्यम की विविध शैलियों को मंच पर जीवंत किया।
समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. स्वाति शर्मा, एमआर बालोच, डॉ. बीआर जयपाल, प्रदीप बारूपाल, डॉ. देवकरण गेवा, डॉ. वंदना मीणा और दुर्गाराम चौधरी सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। अतिथियों ने दिव्यांका के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
शिवम् नाट्यालय की निर्देशिका एवं गुरु डॉ. मंजूषा चन्द्र भूषण सक्सेना ने दिव्यांका को आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनकी वर्षों की कठोर साधना और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि दिव्यांका ने प्रशिक्षण के दौरान अनुशासन और निरंतर अभ्यास के माध्यम से इस महत्वपूर्ण पड़ाव को हासिल किया है।
कार्यक्रम का संचालन संस्था की शिष्याओं मेहल शारदा और इशिता माथुर ने किया। आयोजन ने एक ओर जहां दिव्यांका की उपलब्धि को रेखांकित किया, वहीं जोधपुर में भरतनाट्यम और शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध होती परंपरा की झलक भी प्रस्तुत की।
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