जोधपुर | संस्कृति एवं कला समाचार
पश्चिमी राजस्थान उद्योग हस्तशिल्प उत्सव 2026 के अंतर्गत मंगलवार को देशभक्ति और सामाजिक चेतना से ओत-प्रोत नाटिका “सरहद के चिराग” का प्रभावशाली मंचन किया गया। मुंशी प्रेमचंद की मूल कहानी पर आधारित इस नाटक ने आज की दिशाहीन होती युवा पीढ़ी को आईना दिखाने का सशक्त प्रयास किया। नाटक के माध्यम से युवाओं में सही–गलत की पहचान का अभाव, देशप्रेम से दूरी और परिवार से कटाव जैसे गंभीर विषयों को भावनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों को गहराई तक सोचने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उत्सव समन्वयक महावीर चोपड़ा, दीपक माथुर, रिछपाल, सांस्कृतिक प्रभारी राकेश श्रीवास्तव, अभिनव परिहार एवं अंकुर अग्रवाल ने अतिथि पीआरओ जोधपुर आकांक्षा पालावत और डिस्कॉम की वरिष्ठ लेखाधिकारी पुष्पा के साथ दीप प्रज्वलन किया। इसके पश्चात कार्यक्रम की शुरुआत योग प्रस्तुति से की गई। साईं योगस्थली संस्थान की भगवती चौधरी एवं कपिल मेवाड़ा ने अपने साथियों के साथ विभिन्न योग मुद्राओं का सुंदर प्रदर्शन किया। वैदिक योग प्रस्तुति में शंख मुद्रा, सूर्य नमस्कार और पिरामिड मुद्राओं ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया।
इसके बाद नाटिका “सरहद के चिराग” का मंचन हुआ। मुंशी प्रेमचंद की मूल कहानी पर आधारित इस नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन डॉ. सुनील माथुर ने किया, जबकि आलेख सुधांशु मोहन का रहा। मंच पर 18 थियेटर कलाकारों ने अपनी सशक्त और जीवंत अभिनय क्षमता से कहानी को जीवंत कर दिया। दर्शक पूरे समय नाटक से बंधे नजर आए और भावनात्मक दृश्यों पर तालियों की गूंज सुनाई दी।
नाटक के ग्राफिक्स एवं ध्वनि संयोजन प्रफुल्ल बोराणा द्वारा किया गया, रंगदीपन यश माथुर का रहा तथा साज-सज्जा और वेशभूषा की जिम्मेदारी सुधांशु मोहन ने निभाई। कार्यक्रम का संचालन प्रमोद सिंघल ने कुशलतापूर्वक किया। यह प्रस्तुति न केवल मनोरंजन का माध्यम बनी, बल्कि समाज और युवाओं के लिए एक सार्थक संदेश भी छोड़ गई।
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