राजस्थान में खेजड़ी बचाओ अभियान ने पकड़ी तेज़ी
- Posted on 20 जनवरी 2026
- जोधपुर
- By Rajendra Harsh
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जोधपुर संभाग सहित राजस्थान के विभिन्न जिलों में खेजड़ी एवं अन्य हरे वृक्षों के संरक्षण हेतु कठोर कानून की मांग को लेकर चल रहे “खेजड़ी बचाओ अभियान” के तहत जनसंपर्क अभियान को और तेज कर दिया गया है।
जोधपुर संभाग सहित राजस्थान के विभिन्न जिलों में खेजड़ी एवं अन्य हरे वृक्षों के संरक्षण हेतु कठोर कानून की मांग को लेकर चल रहे “खेजड़ी बचाओ अभियान” के तहत जनसंपर्क अभियान को और तेज कर दिया गया है। मुकाम में आयोजित महापंचायत के निर्णय के अनुरूप आगामी 2 फरवरी 2026 को बीकानेर जिला मुख्यालय पर महापड़ाव एवं आंदोलन का आयोजन किया जाएगा।
इसी क्रम में साधु-संतों के सानिध्य में जोधपुर संभाग के बाड़मेर, सांचौर, जालौर एवं जोधपुर सहित अनेक क्षेत्रों में पर्यावरण प्रेमियों से संपर्क कर उन्हें इस आंदोलन से जोड़ा गया तथा बीकानेर पहुंचने का संकल्प दिलवाया गया।
जनसंपर्क के दौरान लोगों में खेजड़ी वृक्ष एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर गहरी चिंता और जागरूकता देखने को मिली। आमजन, पर्यावरण प्रेमी एवं बिश्नोई समाज इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आए। लोगों का स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते सरकार ने उचित निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है।
आज मीडिया से मुखातिब बिश्नोई समाज के साधु-संतों एवं आंदोलन के संयोजक परशुराम बिश्नोई ने सरकार को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि सरकार बिश्नोई समाज की ताकत को कमजोर समझने की भूल न करे। उन्होंने कहा,
“जो समाज पेड़ों के लिए अपनी जान दे सकता है, वह अपने अस्तित्व, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। यदि सरकार ने बिश्नोई समाज की भावनाओं के अनुरूप कठोर और प्रभावी कानून नहीं बनाया, तो सरकार को इसके परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा। बिश्नोई समाज अब आर-पार की लड़ाई लड़ने जा रहा है।”
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि पर्यावरण प्रेमी एवं बिश्नोई समाज किसी भी कीमत पर हरे पेड़ों की कटाई नहीं होने देगा। यदि जनभावनाओं की अनदेखी की गई, तो इसके लिए पूरी तरह सरकार जिम्मेदार होगी।
वहीं स्वामी सच्चिदानंद महंत, लालासर ने कहा कि इस बार साधु-संत एकजुट होकर धर्म और प्रकृति की पहचान को बचाने के लिए समाज को साथ लेकर इस लड़ाई को लड़ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा,
“जब तक मजबूत और प्रभावी कानून नहीं बनता, तब तक साधु-संत समाज का नेतृत्व करते हुए समाज के लोगों के साथ महापड़ाव पर डटे रहेंगे। इस बार या तो सरकार कानून बनाएगी, या फिर बिश्नोई समाज को जेल में डालने के लिए तैयार रहना होगा।”
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल पेड़ों का नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा का आंदोलन है।
गौरतलब है कि खेजड़ी वृक्ष की रक्षा के लिए बिश्नोई समाज की अमर शहीद मां अमृता देवी के नेतृत्व में 363 लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। आज भी समाज उसी भावना के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए पूरी मजबूती से खड़ा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब राजतंत्र में राजा को झुकाकर कानून बनवाया गया था, तो आज लोकतंत्र में जनता की आवाज़ को अनसुना करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
इस आंदोलन के तहत बाड़मेर के धोरीमना, सांचौर, भीनमाल, जोधपुर के जोलियाली, गोदावास, धवा, फीच, गुड़ा फिटकसानी, खेजड़ली, बावरला, जाजीवाल, धोरा, भोपालगढ़, मानपुरा, फाटा, लांबा, रावर, तिलवासनी, कोसाणा सहित अनेक क्षेत्रों में जनसंपर्क किया गया। साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर के अधिवक्ताओं से चर्चा कर आंदोलन को कानूनी मजबूती देने की रणनीति भी बनाई गई।
इस दौरान स्वामी सच्चिदानंद परसराम विश्नोई रामनिवास बुध नगर रामगोपाल मॉल सुभाष भाम्भू गोपी धायल ओमप्रकाश खीचड़ सहीराम पूनिया एडवोकेट शारदा बिश्नोई निरमा बिश्नोई भंवरी देवी आदि पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे
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