जोधपुर साइबर पुलिस की त्वरित कार्रवाई, डिजिटल अरेस्ट से बुजुर्ग को बचाया
- Posted on 18 अक्टूबर 2026
- जोधपुर
- By Rajendra Harsh
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जोधपुर। जोधपुर साइबर पुलिस थाना की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का शिकार होने जा रहे एक बुजुर्ग को बचा लिया गया। साइबर अपराधियों ने मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर बुजुर्ग को डराया और गिरफ्तारी से बचने के लिए बैंक खातों में जमा राशि सरकारी खातों में वेरिफिकेशन के नाम पर ट्रांसफर करने का दबाव बनाया। समय रहते पुलिस के हस्तक्षेप से बुजुर्ग के 31 लाख रुपये ठगी होने से बच गए। पुलिस के अनुसार, 17 अक्टूबर 2026 को यस बैंक की मैनेजर मनीषा पंवार ने साइबर पुलिस थाना जोधपुर को सूचना दी कि एक बुजुर्ग बैंक में बड़ी रकम का ट्रांजेक्शन करने पहुंचे हैं। उनके साइबर ठगी का शिकार होने की आशंका है। सूचना मिलते ही साइबर पुलिस टीम के राजेश कुमार और कांस्टेबल धीरेन्द्र सिंह बैंक पहुंचे और बुजुर्ग से बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी ली।
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जोधपुर। जोधपुर साइबर पुलिस थाना की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का शिकार होने जा रहे एक बुजुर्ग को बचा लिया गया। साइबर अपराधियों ने मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर बुजुर्ग को डराया और गिरफ्तारी से बचने के लिए बैंक खातों में जमा राशि सरकारी खातों में वेरिफिकेशन के नाम पर ट्रांसफर करने का दबाव बनाया। समय रहते पुलिस के हस्तक्षेप से बुजुर्ग के 31 लाख रुपये ठगी होने से बच गए।
बैंक मैनेजर की सूचना पर तुरंत पहुंची पुलिस
पुलिस के अनुसार, 17 अक्टूबर 2026 को यस बैंक की मैनेजर मनीषा पंवार ने साइबर पुलिस थाना जोधपुर को सूचना दी कि एक बुजुर्ग बैंक में बड़ी रकम का ट्रांजेक्शन करने पहुंचे हैं। उनके साइबर ठगी का शिकार होने की आशंका है। सूचना मिलते ही साइबर पुलिस टीम के राजेश कुमार और कांस्टेबल धीरेन्द्र सिंह बैंक पहुंचे और बुजुर्ग से बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी ली।
व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर बनाया दबाव
बुजुर्ग ने पुलिस को बताया कि 14 अक्टूबर को अज्ञात व्यक्ति ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल कर खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। कॉल करने वाले ने आधार कार्ड के दुरुपयोग, बैंक खातों से मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध लेनदेन का आरोप लगाकर गिरफ्तारी की धमकी दी। आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए बैंक खातों में मौजूद रकम बताए गए सरकारी खातों में वेरिफिकेशन के नाम पर जमा कराने को कहा।
धमकियों से घबराकर बुजुर्ग ने अपनी तीन बैंकों की एफडी तुड़वा दी और 31 लाख रुपये जमा कराने बैंक पहुंच गए। साइबर पुलिस ने पूछताछ के दौरान डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगी की साजिश को पहचान लिया। टीम ने बुजुर्ग को साइबर अपराध के तरीकों की जानकारी देकर समझाया और रकम ट्रांसफर होने से पहले ही उन्हें ठगी से बचा लिया।
पुलिस ने आमजन से की अपील
पुलिस आयुक्त अंशुमन भोमिया के आदेश और पुलिस उपायुक्त शहीन सी. के निर्देशन में साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि कोई भी सरकारी एजेंसी व्हाट्सएप कॉल या वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। वेरिफिकेशन के नाम पर सरकारी खाते में पैसे जमा कराने की मांग साइबर ठगी का संकेत है। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।
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