आईआईटी जोधपुर ने पारंपरिक शिल्प को IPR और आधुनिक बाजारों से जोड़ने की पहल की
- Posted on 22 सितम्बर 2026
- जोधपुर
- By Rajendra Harsh
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जोधपुर। आईआईटी जोधपुर के जोधपुर सिटी नॉलेज एंड इनोवेशन फाउंडेशन (JCKIF) ने पारंपरिक शिल्प को बौद्धिक संपदा अधिकार, डिजाइन नवाचार और आधुनिक बाजारों से जोड़ने की दिशा में पहल की है। जोधपुर सिटी नॉलेज एंड इनोवेशन क्लस्टर (JCKIC) के तहत ‘शिल्प-अधिकार एवं नवसृजन 2.0’ कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें करीब 100 शिल्पकारों, शिक्षकों और डिजाइन विशेषज्ञों ने भाग लिया। एक दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य पारंपरिक शिल्प के संरक्षण के साथ डिजाइन पंजीकरण, उत्पाद विकास, ब्रांडिंग, नवाचार और बाजार से जुड़ाव के अवसरों पर मंथन करना रहा। कार्यक्रम के दो प्रमुख भाग रहे। ‘शिल्प-अधिकार’ के तहत शिल्पकारों के उत्पादों और डिजाइनों को बौद्धिक संपदा अधिकार एवं डिजाइन पंजीकरण के माध्यम से कानूनी संरक्षण देने पर चर्चा की गई।
जोधपुर। आईआईटी जोधपुर के जोधपुर सिटी नॉलेज एंड इनोवेशन फाउंडेशन (JCKIF) ने पारंपरिक शिल्प को बौद्धिक संपदा अधिकार, डिजाइन नवाचार और आधुनिक बाजारों से जोड़ने की दिशा में पहल की है। जोधपुर सिटी नॉलेज एंड इनोवेशन क्लस्टर (JCKIC) के तहत ‘शिल्प-अधिकार एवं नवसृजन 2.0’ कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें करीब 100 शिल्पकारों, शिक्षकों और डिजाइन विशेषज्ञों ने भाग लिया।
एक दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य पारंपरिक शिल्प के संरक्षण के साथ डिजाइन पंजीकरण, उत्पाद विकास, ब्रांडिंग, नवाचार और बाजार से जुड़ाव के अवसरों पर मंथन करना रहा। कार्यक्रम के दो प्रमुख भाग रहे। ‘शिल्प-अधिकार’ के तहत शिल्पकारों के उत्पादों और डिजाइनों को बौद्धिक संपदा अधिकार एवं डिजाइन पंजीकरण के माध्यम से कानूनी संरक्षण देने पर चर्चा की गई। वहीं ‘नवसृजन 2.0’ के माध्यम से पारंपरिक शिल्प में समकालीन डिजाइन और नए उत्पाद विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम का आयोजन JCKIF के अध्यक्ष एवं आईआईटी जोधपुर के निदेशक प्रो. अविनाश कुमार अग्रवाल तथा भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के नेतृत्व में किया गया। उद्घाटन सत्र में डॉ. आकांक्षा चौधरी ने शिल्पकार समुदायों को ज्ञान, नवाचार और बदलते बाजारों तक बेहतर पहुंच के माध्यम से सशक्त बनाने की आवश्यकता बताई।
JCKIC 2.0 के PI एवं आईआईटी जोधपुर के डीन प्रशासन प्रो. श्री प्रकाश तिवारी ने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक अवसरों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। डीन आरएंडडी प्रो. सुनील कुमार खिजवानिया ने शिल्प क्षेत्र में अनुसंधान, तकनीक और नवाचार की भूमिका को रेखांकित किया।
कार्यशाला में आईआईटी जोधपुर और NIFT जोधपुर के विशेषज्ञों ने IPR एवं डिजाइन संरक्षण, डिजाइन नवाचार, ब्रांडिंग, कहानी कहने की कला, उत्पाद मूल्यवर्धन, बाजार से जुड़ाव और शिल्प उन्नयन जैसे विषयों पर सत्र लिए। शिल्पकारों को विशेषज्ञों से सीधे संवाद और विचारों के आदान-प्रदान का अवसर मिला। आयोजकों ने कहा कि पहल का उद्देश्य पारंपरिक शिल्प की सांस्कृतिक पहचान बनाए रखते हुए उसे आधुनिक उपभोक्ताओं की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना और टिकाऊ आजीविका के अवसर बढ़ाना है।
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