स्वास्थ्य शिविर का किया गया आयोजन ।
- Posted on 5 जनवरी 2026
- जोधपुर
- By Rajendra Harsh
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डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर के स्नातकोत्तर कौमारभृत्य विभाग द्वारा 05 जनवरी 2026, सोमवार को पुष्य नक्षत्र के पावन अवसर पर शनिचर जी का थान परिसर में स्वर्णप्राशन संस्कार एवं आयुर्वेदिक बाल स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया।
जोधपुर 05 जनवरी 2026
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर के स्नातकोत्तर कौमारभृत्य विभाग द्वारा 05 जनवरी 2026, सोमवार को पुष्य नक्षत्र के पावन अवसर पर शनिचर जी का थान परिसर में स्वर्णप्राशन संस्कार एवं आयुर्वेदिक बाल स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 12.00 बजे हुआ।
इस अवसर पर प्रोफेसर(वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल, कुलगुरु, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर मुख्य अतिथि के रूप मे उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि के रूप में कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल ने अपने आशीर्वचन में कहा कि आयुर्वेद स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य संरक्षण में महत्वपूर्ण
भूमिका निभाता है। उन्होंने स्वर्णप्राशन संस्कार को भारतीय आयुर्वेदिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण अंग बताते हुए कहा कि यह भावी पीढ़ी को स्वस्थ,
सशक्त एवं संस्कारित बनाने की दिशा में प्रभावी माध्यम है। उन्होंने विश्वविद्यालय के कौमारभृत्य विभाग द्वारा समाजोपयोगी कार्यों एवं बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए ऐसे कार्यक्रमों को निरंतर आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य अतिथि सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया गया। मंगलाचरण एवं धन्वंतरि वंदना के साथ कार्यक्रम को आध्यात्मिक एवं आयुर्वेदिक परंपरा से जोड़ा गया।
कार्यक्रम में प्रो. चंदन सिंह, प्राचार्य, स्नातकोत्तर आयुर्वेद संस्थान, जोधपुर, श्री दलपत सिंह जी डागा, अध्यक्ष, शनिचर जी का थान, प्रो. गोविंद प्रसाद गुप्ता, चिकित्सा अधीक्षक पी जी आई ए, प्रो. डॉ. हरीश कुमार सिंघल, विभागाध्यक्ष, स्नातकोत्तर कौमारभृत्य विभाग, डॉ. रश्मि शर्मा, डॉ. हेमंत शर्मा, श्री महेन्द्र रांका, विभाग के स्नातकोत्तर शोधार्थी सहित स्वर्णप्राशन के लिए आये हुए बच्चों के अभिभावक में उपस्थित रहे।
प्रो. डॉ. हरीश कुमार सिंघल द्वारा स्वर्णप्राशन संस्कार का विस्तृत परिचय प्रस्तुत करते हुए इसके आयुर्वेदिक एवं वैज्ञानिक पक्षों पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि स्वर्णप्राशन बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता, बुद्धि, स्मरण शक्ति तथा समग्र शारीरिक एवं मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अपने संबोधन में श्री दलपत सिंह जी डागा ने समाज में आयुर्वेदिक संस्कारों को बढ़ावा देने हेतु इस प्रकार के शिविरों की निरंतरता पर बल दिया। प्रो. चंदन सिंह, प्राचार्य,पी जी आई ए ने आयुर्वेद को जनस्वास्थ्य से जोड़ने में ऐसे शिविरों की भूमिका को रेखांकित करते हुए अभिभावकों से इसका अधिकाधिक लाभ लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंतर्गत उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा सम्मान का आयोजन किया गया, जिसमें कुलगुरु प्रोफेसर(वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल को आयुर्वेद शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इसके साथ ही प्रो. चंदन सिंह, प्राचार्य,पी जी आई ए, प्रो. गोविंद प्रसाद गुप्ता, चिकित्सालय अधीक्षक, , प्रो. डॉ. हरीश कुमार सिंघल, विभागाध्यक्ष, कौमारभृत्य विभाग तथा स्वर्ण प्राशन कार्यक्रम में सहयोग हेतु डाबर इंडिया लिमिटेड का भी आभार जताया।
कार्यक्रम के अंत में प्रोफेसर डॉ. हरीश कुमार सिंघल द्वारा सभी अतिथियों, आयोजकों, सहयोगियों, स्नातकोत्तर शोधार्थियों एवं उपस्थित अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया गया। यह शिविर आयुर्वेदिक बाल स्वास्थ्य सेवाओं के प्रचार-प्रसार तथा समाज में आयुर्वेद के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।
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