कांग्रेस कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया

राजस्थान की जीवनरेखा मानी जाने वाली अरावली पर्वतमाला को बचाने के लिए आज प्रदेशभर में कांग्रेस पार्टी और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किए। पर्यावरण संरक्षण और अरावली के अस्तित्व को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कई जिलों में विरोध-प्रदर्शन तेज नजर आए। प्रदर्शनकारियों ने अरावली को नुकसान पहुंचाने वाले फैसलों को वापस लेने की मांग की।

 

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जयपुर/जोधपुर।
राजस्थान की जीवनरेखा मानी जाने वाली अरावली पर्वतमाला को बचाने के लिए आज प्रदेशभर में कांग्रेस पार्टी और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किए। पर्यावरण संरक्षण और अरावली के अस्तित्व को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कई जिलों में विरोध-प्रदर्शन तेज नजर आए। प्रदर्शनकारियों ने अरावली को नुकसान पहुंचाने वाले फैसलों को वापस लेने की मांग की।

जोधपुर कलेक्ट्रेट पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि अरावली न केवल राजस्थान बल्कि पूरे उत्तर भारत के पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अरावली के संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

वहीं सीकर जिले में कार्यकर्ताओं ने प्रदेश की सबसे ऊंची पहाड़ियों में शामिल 945 मीटर ऊंचे हर्ष पर्वत पर पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। पहाड़ी क्षेत्र में प्रतीकात्मक प्रदर्शन कर यह संदेश दिया गया कि अरावली की हर पहाड़ी, हर चट्टान संरक्षण की हकदार है और किसी भी कीमत पर इसे नष्ट नहीं होने दिया जाएगा।

अलवर में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि “अरावली राजस्थान के फेफड़ों की तरह है। यदि इसे नुकसान पहुंचा तो आने वाली पीढ़ियों को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों और हालिया फैसलों से अरावली को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।

प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के 20 नवंबर 2025 के फैसले पर भी चिंता जताई। इस फैसले में 100 मीटर से अधिक ऊंची भू-आकृति को ही अरावली मानने के मानक के चलते लगभग 90 प्रतिशत से अधिक पहाड़ियां संरक्षण से बाहर हो सकती हैं। कांग्रेस और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह मानक अरावली के व्यापक और वास्तविक स्वरूप को नजरअंदाज करता है।

प्रदर्शन के दौरान पर्यावरणविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि अरावली के नष्ट होने से जल संकट, बढ़ता प्रदूषण और मरुस्थलीकरण जैसी गंभीर समस्याएं और बढ़ेंगी। उन्होंने सरकार से मांग की कि अरावली की सभी पहाड़ियों को संरक्षण का दर्जा दिया जाए।

प्रदेशभर में हुए इन प्रदर्शनों से स्पष्ट है कि अरावली को बचाने का मुद्दा अब जन आंदोलन का रूप लेता जा रहा है, और आने वाले दिनों में यह संघर्ष और व्यापक हो सकता है।

 
 
 
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Author
Rajendra Harsh
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