चौपासनी शिक्षा समिति में संविधान संशोधन का विरोध

जोधपुर। चौपासनी शिक्षा समिति के संविधान में प्रस्तावित संशोधन को लेकर समाज के विभिन्न संगठनों और प्रबुद्धजनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इस संबंध में आयोजित प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने कहा कि चौपासनी शिक्षा समिति का संचालन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत होता है, जिसमें हजारों आजीवन सदस्यों द्वारा 40 सदस्यीय जनरल काउंसिल का चुनाव किया जाता है। यही निर्वाचित सदस्य कार्यकारिणी का चयन करते हैं। वक्ताओं ने बताया कि वर्तमान संविधान के अनुसार राजपूत एजुकेशन ट्रस्ट के 11 ट्रस्टी जनरल काउंसिल के सदस्य के रूप में कार्यकारिणी चुनाव में मतदान का अधिकार रखते हैं।

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जोधपुर। चौपासनी शिक्षा समिति के संविधान में प्रस्तावित संशोधन को लेकर समाज के विभिन्न संगठनों और प्रबुद्धजनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इस संबंध में आयोजित प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने कहा कि चौपासनी शिक्षा समिति का संचालन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत होता है, जिसमें हजारों आजीवन सदस्यों द्वारा 40 सदस्यीय जनरल काउंसिल का चुनाव किया जाता है। यही निर्वाचित सदस्य कार्यकारिणी का चयन करते हैं।

वक्ताओं ने बताया कि वर्तमान संविधान के अनुसार राजपूत एजुकेशन ट्रस्ट के 11 ट्रस्टी जनरल काउंसिल के सदस्य के रूप में कार्यकारिणी चुनाव में मतदान का अधिकार रखते हैं। उनका आरोप है कि ट्रस्ट प्रबंधन में अपना प्रभाव बढ़ाने के उद्देश्य से पहले ट्रस्टियों की संख्या 11 से बढ़ाकर 14 की गई और अब इसे 20 करने का प्रस्ताव देवस्थान विभाग में संविधान संशोधन के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

26 जून को आयोजित बैठक में समाज के विभिन्न संगठनों एवं बुद्धिजीवियों ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए आशंका जताई कि यदि भविष्य में ट्रस्टियों की संख्या और बढ़ाई गई तो लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए जनरल काउंसिल के सदस्यों का महत्व समाप्त हो जाएगा। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि पिछले कई दशकों में राजपूत एजुकेशन ट्रस्ट ने शिक्षा के क्षेत्र में कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किया। उनका दावा है कि ट्रस्ट की कोई स्वतंत्र संपत्ति या सक्रिय शैक्षणिक गतिविधि नहीं है तथा अब तक किसी छात्र को छात्रवृत्ति भी प्रदान नहीं की गई। इसके विपरीत, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से प्रतिवर्ष आर्थिक सहयोग लिए जाने पर भी सवाल उठाए गए।

बैठक में सर्वसम्मति से "चौपासनी बचाओ संघर्ष समिति" का गठन किया गया, जिसका संयोजक शम्भूसिंह मेड़तिया को बनाया गया। समिति ने प्रस्तावित संशोधन को रोकने के लिए चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। इसके तहत सबसे पहले महाराजा गज सिंह को ज्ञापन सौंपा जाएगा। यदि इसके बावजूद प्रक्रिया नहीं रोकी गई तो पूरे मारवाड़ में जनजागरण अभियान, सद्बुद्धि यज्ञ, रैलियां, उम्मेद भवन के सामने धरना-प्रदर्शन, क्रमिक भूख हड़ताल तथा आवश्यकता पड़ने पर आमरण अनशन जैसे आंदोलनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। समिति ने इस प्रस्तावित संशोधन को लोकतांत्रिक व्यवस्था के विरुद्ध बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।

 
 
 
 
 
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Author
Rajendra Harsh
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