कुत्तों के हमले से कृष्ण मृग (काले हिरण) की मौत

बनाड़ रेलवे स्टेशन के सामने स्थित जोजरी नदी फिर कुत्तों के हमले से कृष्ण मृग (काले हिरण)  की मौत.....? आसपास के क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर गंभीर स्थितियां है।

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जोधपुर।
बनाड़ रेलवे स्टेशन के सामने स्थित जोजरी नदी फिर कुत्तों के हमले से कृष्ण मृग (काले हिरण)  की मौत.....? आसपास के क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर गंभीर स्थितियां है। इस संबंध में राजू राम बिश्नोई, राकेश बिश्नोई, मुकबधिर, पर्यावरण प्रेमी फरसराम बिश्नोई एवं अनिल बुद्ध नगर द्वारा वन विभाग को संयुक्त रूप से लिखित शिकायत दी गई।
शिकायत में बताया गया कि आज कुतों के हमले व तार बाड़ में फ़सने के कृष्णा मृग  की मृत्यु हो गई है क्षेत्र में खेतों के चारों ओर की गई अवैध तार-बाड़ (फेंसिंग) के कारण काले हिरण, चिंकारा, नीलगाय सहित अन्य संरक्षित वन्यजीवों की आवाजाही बाधित हो रही है तथा उनके घायल होने और मृत्यु की लगातार घटनाएं हो रही हैं। पिछले दो माह में लगभग 15 घटनाएं इसी क्षेत्र में हो चुकी है
शिकायत पर सूचना मिलने के बाद वन विभाग की ओर से क्षेत्रीय वन अधिकारी द्वितीय सवाई सिंह, वनपाल विक्रम सिंह, सहायक वनपाल भवानी सिंह, वनपाल चंद्र प्रकाश एवं वनपाल आशीष नवल मौके पर पहुंचे। मौके पर की गई कार्रवाई के दौरान कुत्तों द्वारा शिकार किए गए एक काले हिरण का मेडिकल परीक्षण (पोस्टमार्टम) करवाकर अंतिम संस्कार किया गया तथा प्रकरण को अग्रिम कार्रवाई हेतु उच्च स्तर पर प्रेषित किया गया।
पर्यावरण प्रेमी रामनिवास बुध नगर  का कहना है कि कार्रवाई  केवल घटना के बाद की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। यदि समय रहते अवैध तार-बाड़ हटाने, नियमित गश्त करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाते, तो कई बेजुबान वन्यजीवों की जान बचाई जा सकती थी। यह स्थिति वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
शिकायतकर्ता एवं पर्यावरण प्रेमियों की मांग है कि—
जोजारी नदी क्षेत्र एवं वन्य जीव बाहुल्य क्षेत्र आसपास की सभी अवैध तार-बाड़ तुरंत हटाई जाए।
संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी निगरानी व नियमित गश्त व्यवस्था लागू की जाए।
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जाए।
पर्यावरण प्रेमियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग द्वारा कठोर और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो आम नागरिकों एवं पर्यावरण संगठनों को मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी वन विभाग एवं प्रशासन की होगी।
वन्यजीव हमारी प्राकृतिक धरोहर हैं। उनकी रक्षा के लिए अब केवल औपचारिक कार्रवाई नहीं, बल्कि सख्त और सतत कदम उठाना अनिवार्य है।

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Author
Rajendra Harsh
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