मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 05:53 AM

भवानी आदर्श विद्या मंदिर में मातृ सम्मेलन आयोजित

जोधपुर। भवानी आदर्श विद्या मंदिर में मातृ सम्मेलन का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मातृशक्ति ने भाग लिया। सम्मेलन में माताओं की भूमिका, संस्कारों के महत्व और बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में परिवार की भूमिका पर वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य रामचन्द्र पालीवाल ने किया। उन्होंने विद्यालय का वृत्त एवं परिचय प्रस्तुत करते हुए संस्था की शैक्षिक एवं संस्कारपरक गतिविधियों की जानकारी दी। इसके बाद मुख्य वक्ता गजेंद्र कंवर ने मातृशक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला।

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जोधपुर। भवानी आदर्श विद्या मंदिर में मातृ सम्मेलन का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मातृशक्ति ने भाग लिया। सम्मेलन में माताओं की भूमिका, संस्कारों के महत्व और बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में परिवार की भूमिका पर वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य रामचन्द्र पालीवाल ने किया। उन्होंने विद्यालय का वृत्त एवं परिचय प्रस्तुत करते हुए संस्था की शैक्षिक एवं संस्कारपरक गतिविधियों की जानकारी दी। इसके बाद मुख्य वक्ता गजेंद्र कंवर ने मातृशक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला।

गजेंद्र कंवर ने कहा कि ‘माँ’ शब्द में अपार शक्ति समाहित है। माँ ही बच्चे की प्रथम गुरु होती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक माँ को अपने शब्दों और आचरण की शक्ति को समझना चाहिए, क्योंकि परिवार में बच्चों को मिलने वाले संस्कार उनके व्यक्तित्व की नींव रखते हैं। केवल विद्यालय में मिलने वाली शिक्षा से बच्चा संस्कारवान नहीं बनता, बल्कि घर ही उसकी पहली पाठशाला होती है। माता-पिता के व्यवहार और वातावरण का बच्चे के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

आचार्य श्रीमद् विजय चिदानन्द सूरीश्वर महाराज ने मातृशक्ति को अतुलनीय बताते हुए कहा कि माँ अपने संस्कारों के माध्यम से समाज का निर्माण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि बच्चे में संस्कारों का बीजारोपण जन्म के बाद ही नहीं, बल्कि गर्भावस्था से ही शुरू हो जाता है। इसलिए माताओं की जिम्मेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि माँ परिवार में विभिन्न भूमिकाओं का निर्वहन करते हुए बच्चों को सही दिशा प्रदान करती है।

वक्ताओं ने माताओं से बच्चों के साथ संवाद बनाए रखने, उन्हें अच्छे संस्कार देने और परिवार में सकारात्मक वातावरण तैयार करने का आह्वान किया। सम्मेलन के दौरान मातृशक्ति की सामाजिक एवं पारिवारिक भूमिका पर भी चर्चा हुई।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय समिति के अध्यक्ष ओम प्रकाश माहेश्वरी ने सम्मेलन में उपस्थित सभी मातृशक्तियों का आभार व्यक्त किया।

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Author
Rajendra Harsh
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