बैंककर्मियों ने की एक दिन की हड़ताल

जोधपुर- यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियन्स के आह्वान पर बैंककर्मी एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल पर रहे। संयोजक राजन गहलोत ने बताया कि सप्ताह में पांच कार्यदिवस की मांग को लेकर प्रवीण भाटी एवं अखिलेश चौधरी की संयुक्त अध्यक्षता में बैंक ऑफ इण्डिया आंखलिया चौराहे पर सैंकड़ों बैंककर्मियों ने प्रदर्शन किया।

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बैंककर्मियों ने की एक दिन की हड़ताल, सरकारी अवकाश के कारण चौथे दिन भी बैंकों में रहा कामकाज ठप

केन्द्र, राज्य सरकार, आर. बी.आई., इंश्योरेंस सेक्टर की तर्ज पर बैंकों में भी सप्ताह में पांच दिवस की मांग 


जोधपुर- यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियन्स के आह्वान पर बैंककर्मी एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल पर रहे। संयोजक राजन गहलोत ने बताया कि सप्ताह में पांच कार्यदिवस की मांग को लेकर प्रवीण भाटी एवं अखिलेश चौधरी की संयुक्त अध्यक्षता में बैंक ऑफ इण्डिया आंखलिया चौराहे पर सैंकड़ों बैंककर्मियों ने प्रदर्शन किया। भवानी सोलंकी ने बताया कि समस्त सार्वजनिक क्षेत्र, क्षेत्रीय ग्रामीण, सहकारी एवं निजी क्षेत्र के बैंकों में पूर्ण हड़ताल रही।
राजेश गहलोत ने बताया कि बैंक अधिकारी एवं कर्मचारी पिछले लगभग पाँच वर्षों से पाँच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने की माँग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख माँग है कि बैंकों में प्रत्येक शनिवार को अवकाश घोषित किया जाए, जैसा कि भारतीय रिज़र्व बैंक, अधिकांश केंद्र व राज्य सरकार के कार्यालयों, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC), जनरल इंश्योरेंस कंपनियों तथा कई निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठानों में पहले से ही लागू है। प्रवीण सिंह ने बताया कि इस माँग को लेकर बैंक अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा समय-समय पर अनेक आंदोलन, प्रदर्शन एवं कार्यक्रम आयोजित किए गए, किन्तु अभी तक इस माँग को स्वीकार नहीं किया गया है। यद्यपि भारतीय बैंक संघ ने यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को स्वीकृति हेतु प्रेषित किया हुआ है, परंतु लंबे समय बीत जाने के बावजूद केंद्र सरकार की स्वीकृति प्राप्त नहीं हो सकी है, जिसके कारण बैंकिंग यूनियनों में भारी रोष एवं असंतोष व्याप्त है। जगदीश बेनीवाल एवं मुकेश भाटी ने बताया कि मांग नहीं माने जाने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा और अनिश्चितकालीन हड़ताल की तरफ बढ़ा जाएगा। सभा को श्रवण सोलंकी, देवेन्द्र घारू, हनुमान विशनोई, नरपत गहलोत, मोनालिसा, ओंकार टाक, देवीलाल चौहान, मनीष देवड़ा, खेत सिंह, राजेश परिहार, सचिन, राजेश सोलंकी, भास्कर पंवार, दलपत राम, राकेश सोलंकी, वेदप्रकाश आदि ने सम्बोधित किया।

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Author
Rajendra Harsh
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