आर्य समाज ने सर्वप्रथम हिन्दी को आर्यभाषा कहा : डॉ. रामदयाल
- Posted on 22 सितम्बर 2026
- जोधपुर
- By Rajendra Harsh
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जोधपुर। आर्य समाज शास्त्री नगर के तत्वावधान में शिवालिक पब्लिक स्कूल में स्वामी दयानंद सरस्वती कृत ‘आर्य उद्देश्य रत्न माला’ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वैदिक विद्वान डॉ. रामदयाल आर्य ने विद्यार्थियों को आर्य समाज, हिन्दी भाषा और वैदिक संस्कारों के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आर्य समाज ने सर्वप्रथम हिन्दी को ‘आर्यभाषा’ कहा और सभी आर्य समाजियों के लिए हिन्दी का ज्ञान आवश्यक बताया। डॉ. रामदयाल ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने वेदों की व्याख्या संस्कृत के साथ-साथ हिन्दी में भी की। इसी प्रकार स्वामी श्रद्धानंद ने अनेक कठिनाइयों के बावजूद देवनागरी लिपि में पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन कराया, जबकि इससे पहले उनका प्रकाशन उर्दू में होता था। उन्होंने विद्यार्थियों से हिन्दी भाषा के अध्ययन और उसके महत्व को समझने का आह्वान किया।
जोधपुर। आर्य समाज शास्त्री नगर के तत्वावधान में शिवालिक पब्लिक स्कूल में स्वामी दयानंद सरस्वती कृत ‘आर्य उद्देश्य रत्न माला’ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वैदिक विद्वान डॉ. रामदयाल आर्य ने विद्यार्थियों को आर्य समाज, हिन्दी भाषा और वैदिक संस्कारों के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आर्य समाज ने सर्वप्रथम हिन्दी को ‘आर्यभाषा’ कहा और सभी आर्य समाजियों के लिए हिन्दी का ज्ञान आवश्यक बताया।
डॉ. रामदयाल ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने वेदों की व्याख्या संस्कृत के साथ-साथ हिन्दी में भी की। इसी प्रकार स्वामी श्रद्धानंद ने अनेक कठिनाइयों के बावजूद देवनागरी लिपि में पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन कराया, जबकि इससे पहले उनका प्रकाशन उर्दू में होता था। उन्होंने विद्यार्थियों से हिन्दी भाषा के अध्ययन और उसके महत्व को समझने का आह्वान किया।
आर्य समाज शास्त्री नगर के मंत्री सुधांशु टाक ने बताया कि प्रतियोगिता के लिए करीब दो माह पूर्व शिवालिक पब्लिक स्कूल के 100 विद्यार्थियों को ‘आर्य उद्देश्य रत्न माला’ पुस्तक वितरित की गई थी। इनमें से करीब 80 विद्यार्थियों ने प्रतियोगिता में उत्साहपूर्वक भाग लिया। पुस्तक में ईश्वर का स्वरूप, मोक्ष, पाप, पुण्य सहित जीवन से जुड़े विभिन्न गूढ़ विषयों को सरल भाषा में समझाया गया है।
डॉ. रामदयाल आर्य ने बताया कि प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैदिक संस्कार, नैतिक मूल्यों और ईश्वर के वास्तविक स्वरूप के प्रति समझ विकसित करना है। इसके साथ ही हिन्दी भाषा के महत्व को विद्यार्थियों तक पहुंचाना भी कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य रहा।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य हुक्मीचंद गौड़, डायरेक्टर पृथ्वीराज गौड़, हितेश, भवानी सिंह शेखावत सहित अन्य शिक्षक एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया गया। आयोजकों के अनुसार प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों को आगामी कार्यक्रम में पुरस्कृत किया जाएगा।
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