दुधिया रोशनी से नहाया नेहरू बाल उद्यान

जोधपुर। सरदारपुरा स्थित नेहरू बाल उद्यान, जो कभी शहरवासियों के लिए सुकून और बच्चों की किलकारियों का केंद्र रहा है, अब फिर से अपनी पहचान की ओर लौटता नजर आ रहा है। बीते दो माह से चल रहे नेहरू बाल उद्यान बचाओ अभियान को जहां एक ओर आमजन का व्यापक समर्थन मिल रहा है

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जोधपुर। सरदारपुरा स्थित नेहरू बाल उद्यान, जो कभी शहरवासियों के लिए सुकून और बच्चों की किलकारियों का केंद्र रहा है, अब फिर से अपनी पहचान की ओर लौटता नजर आ रहा है। बीते दो माह से चल रहे नेहरू बाल उद्यान बचाओ अभियान को जहां एक ओर आमजन का व्यापक समर्थन मिल रहा है, वहीं शहर विधायक अतुल भंसाली ने भी इस पहल को गंभीरता से लेते हुए उद्यान के संरक्षण और विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।

विधायक अतुल भंसाली ने उद्यान में लंबे समय से चली आ रही अव्यवस्थाओं टूटे झूले, फैली जंगली घास, अंधेरा और बिजली के खुले तार को गंभीरता से लेते हुए निगम प्रशासन को त्वरित सुधार के निर्देश दिए। उनके निर्देशों के बाद निगम ने अभियान मोड में काम शुरू करते हुए पहले चरण में उद्यान में सुदृढ़ रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित की।

सोमवार को उद्यान में एलईडी लाइटों और हाईमास्ट लाइट्स की स्थापना के साथ ही वर्षों से उपेक्षित नहर की सफाई कर दलदल हटाया गया। लगभग 60 वर्ष पुराने इस उद्यान में यह पहल न केवल सौंदर्य बढ़ाने वाली है, बल्कि सुरक्षा और उपयोगिता की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पर्यावरण प्रेमी और गोल बिल्डिंग मोहल्ला विकास समिति के अध्यक्ष अरुण माथुर ने विधायक भंसाली के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि अब पार्क दुधिया रोशनी से जगमगा उठा है, जिससे यहां आने वाले बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि पहले अंधेरे के कारण लोग शाम के समय पार्क में आने से कतराते थे, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है।

स्थानीय लोगों की मांग पर विधायक ने न केवल प्रकाश व्यवस्था को प्राथमिकता दी, बल्कि बच्चों के झूलों की मरम्मत और अन्य बुनियादी सुविधाओं के सुधार का भी भरोसा दिलाया है। इसके साथ ही डेकोरेटिव लाइटिंग और वॉकिंग ट्रैक के आसपास अतिरिक्त रोशनी की योजना पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे पार्क का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।

स्पष्ट है कि विधायक अतुल भंसाली के सक्रिय हस्तक्षेप और जनसहभागिता के चलते नेहरू बाल उद्यान फिर से शहर की जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बनने की ओर अग्रसर है। यह पहल न केवल एक पार्क के पुनर्जीवन की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जब जनप्रतिनिधि और नागरिक साथ मिलकर प्रयास करें, तो बदलाव संभव है।

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Author
Rajendra Harsh
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