₹84 के दो मिर्चीबड़ों ने खोली जीएसटी गड़बड़ी

जयपुर। राजस्थान में जोधपुर के एक नामी मिर्चीबड़ा व्यवसायी की कथित जीएसटी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। स्टेट जीएसटी विभाग ने जांच के दौरान पाया कि व्यवसायी ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के माध्यम से बिक्री करने के बावजूद अपने जीएसटी रिटर्न में ऐसी सप्लाई को शून्य दर्शा रहा था। मामले में विभाग ने व्यवसायी को नोटिस जारी कर जून के प्रथम सप्ताह तक जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जानकारी के अनुसार स्टेट जीएसटी विभाग ने तीन दिन पहले संदेह के आधार पर व्यवसायी के प्रतिष्ठान की जांच शुरू की थी।

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जयपुर। राजस्थान में जोधपुर के एक नामी मिर्चीबड़ा व्यवसायी की कथित जीएसटी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। स्टेट जीएसटी विभाग ने जांच के दौरान पाया कि व्यवसायी ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के माध्यम से बिक्री करने के बावजूद अपने जीएसटी रिटर्न में ऐसी सप्लाई को शून्य दर्शा रहा था। मामले में विभाग ने व्यवसायी को नोटिस जारी कर जून के प्रथम सप्ताह तक जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

जानकारी के अनुसार स्टेट जीएसटी विभाग ने तीन दिन पहले संदेह के आधार पर व्यवसायी के प्रतिष्ठान की जांच शुरू की थी। जांच के लिए अधिकारियों ने एक विशेष तरीका अपनाया। अधिकारियों ने अपने कार्यालय से ही ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के जरिए दो मिर्चीबड़ों का ऑर्डर दिया, जिसकी कुल कीमत 84 रुपए थी। ऑर्डर स्वीकार होने और बिल जारी होने के बाद संबंधित व्यवसायी विभाग की निगरानी में आ गया।

जांच में सामने आया कि व्यवसायी ऑनलाइन माध्यम से खाद्य सामग्री की बिक्री कर रहा था, लेकिन जीएसटी रिटर्न में इस बिक्री का उल्लेख नहीं किया गया। अधिकारियों के अनुसार ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियां ग्राहकों से जीएसटी वसूलकर सरकार के खाते में जमा कराती हैं और इसके आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा भी किया जाता है।

विभाग का आरोप है कि व्यवसायी ने वास्तविक कर जमा किए बिना फर्जी तरीके से आईटीसी का लाभ लिया। इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा है। प्रारंभिक जांच में अनियमितता के संकेत मिलने के बाद विभाग ने विस्तृत रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया है।

स्टेट जीएसटी विभाग अब कारोबारी द्वारा लिए गए आईटीसी, संभावित कर देनदारी और लगाए जाने वाले जुर्माने की गणना कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन बिक्री पर निगरानी लगातार बढ़ाई जा रही है। ऐसे मामलों में तकनीकी विश्लेषण और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से प्राप्त डेटा की मदद से कर चोरी की पहचान की जा रही है। मामले की जांच फिलहाल जारी है।

 
 
 
 
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Author
Rajendra Harsh
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