आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीक के दौर में आत्मनिर्भरता ही देश की संप्रभुता की सबसे बड़ी गारंटी है

  • Posted on 16 मई 2026
  • खास
  • By Rajendra Harsh
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जोधपुर। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और आधुनिक तकनीक के इस दौर में आत्मनिर्भरता ही किसी भी देश की संप्रभुता की सबसे बड़ी गारंटी बन चुकी है। वे शनिवार को जोधपुर स्थित रक्षा प्रयोगशाला (डिफेंस लैबोरेटरी) के 68वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।

 

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जोधपुर। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और आधुनिक तकनीक के इस दौर में आत्मनिर्भरता ही किसी भी देश की संप्रभुता की सबसे बड़ी गारंटी बन चुकी है। वे शनिवार को जोधपुर स्थित रक्षा प्रयोगशाला (डिफेंस लैबोरेटरी) के 68वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।

अपने संबोधन में शेखावत ने कहा कि वैश्विक स्तर पर युद्ध और सुरक्षा की परिभाषा तेजी से बदल रही है। अब केवल सैनिकों की संख्या या पारंपरिक हथियार किसी देश की ताकत तय नहीं करते, बल्कि तकनीकी क्षमता, डिजिटल संरचना और नवाचार ही असली सामरिक शक्ति बन गए हैं। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध सहित कई अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक युद्धों में तकनीक निर्णायक भूमिका निभा रही है।

उन्होंने कहा कि पेमेंट गेटवे, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और एआई जैसी तकनीकें अब केवल आर्थिक या औद्योगिक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मजबूती का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। ऐसे में भारत के लिए तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों के माध्यम से देश रक्षा उत्पादन, अनुसंधान और स्वदेशी तकनीक विकास में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।

उन्होंने रक्षा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें आत्मसंतोष से बचते हुए निरंतर नवाचार, अनुसंधान और नई तकनीकों के विकास पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों की मेहनत और अनुसंधान ही भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाएंगे।

कार्यक्रम में रक्षा प्रयोगशाला के महानिदेशक आर.वी. हरप्रसाद सहित सेना और रक्षा क्षेत्र के कई वरिष्ठ अधिकारी एवं वैज्ञानिक उपस्थित रहे।

 
 
 
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