खेजड़ी बचाओ आंदोलन

खेजड़ी एवं अन्य हरे वृक्षों के संरक्षण को लेकर चल रहे खेजड़ी बचाओ आंदोलन के तहत आगामी 2 फरवरी को बीकानेर जिला मुख्यालय पर प्रस्तावित महापड़ाव की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं। इस महापड़ाव को लेकर जोधपुर संभाग सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

WhatsApp Image 2026-01-30 at 6.42.08 PM-PrBhp7J7sr.jpeg

खेजड़ी बचाओ आंदोलन: बीकानेर महापड़ाव की तैयारियां तेज, साधु-संतों के सानिध्य में होगा ऐतिहासिक जनआंदोलन

खेजड़ी एवं अन्य हरे वृक्षों के संरक्षण को लेकर चल रहे खेजड़ी बचाओ आंदोलन के तहत आगामी 2 फरवरी को बीकानेर जिला मुख्यालय पर प्रस्तावित महापड़ाव की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं। इस महापड़ाव को लेकर जोधपुर संभाग सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को आंदोलन के उद्देश्यों से अवगत कराया जा रहा है और अधिक से अधिक संख्या में बीकानेर पहुंचने का आह्वान किया जा रहा है।

आंदोलन में ग्रामीण युवा, महिलाएं और पर्यावरण प्रेमी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। प्रत्येक गांव में बसों, निजी वाहनों और अन्य साधनों से बीकानेर पहुंचने की योजनाबद्ध तैयारियां की जा रही हैं। इसी क्रम में बड़ी संख्या में बैनर, झंडे और तख्तियां भी तैयार की जा रही हैं, जिन पर “खेजड़ी बचाओ – पर्यावरण बचाओ”, “जीव दया पालणी”, “रूंख लिलो नी घावे”, “सिर साठे रूँख रहें तो भी सस्तो जाण”, “खेजड़ी के लिए कठोर कानून बनाओ” और “हरे वृक्षों के लिए कठोर कानून बनाओ” जैसे प्रेरणादायक नारे अंकित हैं।

आंदोलन से जुड़े रामनिवास बुध नगर ने बताया कि जोधपुर, जालौर, पाली सहित आसपास के जिलों से लगभग 15 से 20 हजार लोग 2 फरवरी को बीकानेर पहुंचकर महापड़ाव में भाग लेंगे। पर्यावरण संरक्षण को लेकर आमजन में भारी उत्साह देखा जा रहा है और यह आंदोलन अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है।

यह महापड़ाव पूर्णतः बिश्नोई समाज के साधु-संतों के सानिध्य में आयोजित किया जाएगा। आंदोलन के दौरान लिए जाने वाले सभी निर्णय समाज के समक्ष, बिश्नोई समाज और समस्त पर्यावरण प्रेमियों की आपसी सहमति से तय किए जाएंगे। आंदोलन पूरी तरह अहिंसक, अनुशासित और सामाजिक सहभागिता पर आधारित रहेगा।

खेजड़ी बचाओ आंदोलन के माध्यम से सरकार से यह मांग की जा रही है कि खेजड़ी सहित सभी हरे वृक्षों के संरक्षण के लिए कठोर और प्रभावी कानून बनाए जाएं, ताकि पर्यावरण, वन्यजीव और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

 
 
0
Author
Rajendra Harsh
Author
Rajendra Harsh

Write a Response