माँ नर्मदा जी की लगभग 3,800 किलोमीटर की पावन पदयात्रा

जोधपुर। पावन माँ नर्मदा पदयात्रा का ऐतिहासिक एवं दिव्य समापन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। श्री श्री दिनदयालु मोनी जी महाराज की असीम, अपार एवं करुणामयी कृपा तथा परम पूजनीय गुरुदेव श्री नागराज पुरी जी महाराज, ओघड़ नाथ महादेव मंदिर, नाग पहाड़ी जोधपुर के सान्निध्य में इस अलौकिक पदयात्रा ने एक दुर्लभ आध्यात्मिक इतिहास रच दिया।

WhatsApp Image 2026-01-22 at 12.36.53 AM-ipMteKNwBM.jpeg

जोधपुर। पावन माँ नर्मदा पदयात्रा का ऐतिहासिक एवं दिव्य समापन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। श्री श्री दिनदयालु मोनी जी महाराज की असीम, अपार एवं करुणामयी कृपा तथा परम पूजनीय गुरुदेव श्री नागराज पुरी जी महाराज, ओघड़ नाथ महादेव मंदिर, नाग पहाड़ी जोधपुर के सान्निध्य में इस अलौकिक पदयात्रा ने एक दुर्लभ आध्यात्मिक इतिहास रच दिया।

गुरुदेव श्री नागराज पुरी जी महाराज ने ॐ ओरेश्वर से माँ नर्मदा जी की लगभग 3,800 किलोमीटर लंबी पावन पदयात्रा मात्र 48 दिनों में पैदल पूर्ण कर एक अद्वितीय कीर्तिमान स्थापित किया। सामान्यतः माँ नर्मदा की इस पवित्र परिक्रमा को पूर्ण करने में एक वर्ष अथवा उससे अधिक समय लगता है, किंतु गुरुदेव ने अपनी दृढ़ साधना, संकल्प शक्ति और दिव्य कृपा से इस असंभव प्रतीत होने वाली यात्रा को अल्प समय में पूर्ण कर सभी श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

यह पदयात्रा केवल दूरी तय करने का साधन नहीं रही, बल्कि यह तपस्या, साधना, त्याग, संकल्प और गुरु-भक्ति का जीवंत उदाहरण बनकर उभरी। यात्रा के प्रत्येक चरण में माँ नर्मदा जी की कृपा, गुरुदेव की अखंड साधना और संत-शक्ति का अद्भुत प्रभाव स्पष्ट रूप से अनुभूत हुआ। मार्ग में स्थान-स्थान पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा, आरती और भजन-कीर्तन के माध्यम से गुरुदेव का भव्य स्वागत किया।

इस पावन पदयात्रा का समापन समाज के लिए आस्था, प्रेरणा और आध्यात्मिक चेतना का अमूल्य संदेश लेकर आया है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिव्य यात्रा से न केवल व्यक्तिगत जीवन में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ है, बल्कि समाज में भी धर्म, संस्कार और सेवा भावना को नई दिशा मिली है।

समापन अवसर पर उपस्थित भक्तों ने गुरुदेव के चरणों में कोटि-कोटि नमन करते हुए माँ नर्मदा जी से यही प्रार्थना की कि उनकी कृपा समस्त मानवता पर सदैव बनी रहे और गुरुदेव की करुणा-दृष्टि सभी भक्तों पर निरंतर बनी रहे।

 
 
 
0
Author
Rajendra Harsh
Author
Rajendra Harsh

Write a Response