जोधपुर। साध्वी प्रेम बाईसा मृत्यु प्रकरण को लेकर मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। इस बीच राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन ने नर्सिंग अधिकारी के पक्ष में सामने आते हुए पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर न्याय की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि मामले में नर्सिंग अधिकारी को अनावश्यक रूप से विवाद में घसीटा जा रहा है, जबकि उनका उद्देश्य केवल मरीज की मदद करना था।
राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष विजेन्द्र सिंह मेड़तिया के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि नर्सिंग अधिकारी देवी सिंह राजपुरोहित के खिलाफ किसी प्रकार की अनुचित कार्रवाई न की जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए।
जिलाध्यक्ष विजेन्द्र सिंह मेड़तिया ने बताया कि समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से इस प्रकरण में नर्सिंग अधिकारी का नाम लगातार उछाला जा रहा है, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि नर्सिंग अधिकारी ने मानवता के नाते कार्य किया था। साध्वी प्रेम बाईसा के परिजनों, विशेष रूप से उनके पिता द्वारा बार-बार बुलाने पर वे आश्रम पहुंचे और उपचार के तहत इंजेक्शन लगाया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नर्सिंग अधिकारी का किसी भी प्रकार से मरीज को नुकसान पहुंचाने का कोई उद्देश्य नहीं था। साथ ही, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यह सामने नहीं आया है कि मृत्यु इंजेक्शन के कारण हुई है। ऐसे में बिना तथ्यों के आधार पर किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं है।
प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस कमिश्नर से आग्रह किया कि जांच पूरी होने से पहले नर्सिंग अधिकारी के खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाए और उन्हें न्याय दिलाया जाए। इस दौरान एसोसिएशन के अन्य पदाधिकारियों ने भी अपने विचार रखे और निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।
पुलिस कमिश्नर ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब तक की जांच में नर्सिंग अधिकारी के खिलाफ किसी प्रकार के आपराधिक आरोप दर्ज नहीं किए गए हैं और आगे भी कार्रवाई पूरी तरह से नियमों के अनुसार ही की जाएगी।
इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल में गोपाल व्यास, सैय्यद इमरान, नरसिंह परिहार, बसंत रॉयल, बिनु गुप्ता, सुरेंद्र चौधरी, प्रेमलता चौधरी, सुरेंद्र पवार, नंद लाल, किशन सिंह राजपुरोहित, सूर्या चौधरी, बस्तीराम सहित कई सदस्य मौजूद रहे।
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