श्रीमाली समाज सर्वगोत्रीय भवन निर्माण की राष्ट्रीय महाबैठक आयोजित
- Posted on 21 सितम्बर 2026
- सामान्य समाचार
- By Rajendra Harsh
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भीनमाल। श्रीमाली ब्राह्मणों की आदि उत्पत्ति स्थली भीनमाल में “श्रीमाली ब्राह्मण सर्वगौरव भवनम्” के निर्माण को लेकर ऐतिहासिक राष्ट्रीय महाबैठक आयोजित हुई। बैठक में देश के विभिन्न क्षेत्रों से समाजबंधुओं ने भाग लिया। इस दौरान भवन निर्माण को लेकर विस्तृत चर्चा के साथ नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से गठन किया गया। बैठक की अध्यक्षता ठाकुर शेखर व्यास ने की। मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय ज्योतिषाचार्य पंडित घनश्याम जोशी रहे। विशेष प्रणेता-प्रवर्तक के रूप में विधु शेखर दवे, सुकनलाल दवे, कांतिलाल ठाकुर केशवना और पंडित बालकृष्ण शास्त्री सहित समाज के कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे।
भीनमाल। श्रीमाली ब्राह्मणों की आदि उत्पत्ति स्थली भीनमाल में “श्रीमाली ब्राह्मण सर्वगौरव भवनम्” के निर्माण को लेकर ऐतिहासिक राष्ट्रीय महाबैठक आयोजित हुई। बैठक में देश के विभिन्न क्षेत्रों से समाजबंधुओं ने भाग लिया। इस दौरान भवन निर्माण को लेकर विस्तृत चर्चा के साथ नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से गठन किया गया।
बैठक की अध्यक्षता ठाकुर शेखर व्यास ने की। मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय ज्योतिषाचार्य पंडित घनश्याम जोशी रहे। विशेष प्रणेता-प्रवर्तक के रूप में विधु शेखर दवे, सुकनलाल दवे, कांतिलाल ठाकुर केशवना और पंडित बालकृष्ण शास्त्री सहित समाज के कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में सर्वसम्मति से गठित राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अध्यक्ष पंडित घनश्याम जोशी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुकनलाल दवे, सुरेंद्र त्रिवेदी, कांतिलाल ठाकुर, विधु शेखर दवे, किशोरभाई मोतीवाला, बालकृष्ण शास्त्री, जयंतिलाल दवे और कमलेश त्रिवेदी को जिम्मेदारियां दी गईं। महासचिव दिनेशकुमार दवे, कोषाध्यक्ष चेतनभाई अवस्थी, राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. घनश्याम व्यास, युवा अध्यक्ष महिपाल अवस्थी और संगठन मंत्री ललित शर्मा नियुक्त किए गए।
कार्यकारिणी सदस्यों में विजयराज जोशी वणधर, चंद्रशेखर, अश्विनी व्यास, हितेंद्र व्यास और ओमप्रकाश दवे सहित अन्य समाजबंधुओं को शामिल किया गया। बैठक में अहमदाबाद, जोधपुर, जयपुर, राजकोट, बैंगलोर सहित विभिन्न क्षेत्रों से समाज के सैकड़ों प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
भवन नहीं, पंच-तीर्थ बनाने का संकल्प
बैठक में समाज के प्रस्तावित भवन को केवल भवन के रूप में नहीं, बल्कि “पंच-तीर्थ” के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया गया। इसके तहत इसे संस्कार तीर्थ, सत्संग तीर्थ, ज्योतिष एवं श्रीमाल पुराण शोध तीर्थ, ज्ञान तीर्थ और सेवा तीर्थ के रूप में विकसित करने की योजना रखी गई।
ज्ञान तीर्थ के अंतर्गत पुस्तकालय एवं छात्रावास तथा सेवा तीर्थ के तहत गौशाला एवं यात्री निवास की परिकल्पना की गई है। बैठक में समाज के इतिहास, परंपरा, शिक्षा, शोध और सेवा गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। उपस्थित समाजबंधुओं ने भवन निर्माण के लिए सामूहिक सहयोग और सहभागिता का संकल्प लिया।
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