जोधपुर: उम्मेद अस्पताल में प्रतिदिन बढ़ती अव्यवस्था

जोधपुर स्थित उम्मेद अस्पताल, जो प्रदेश का प्रमुख बाल चिकित्सालय माना जाता है, इन दिनों गंभीर अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में है। अस्पताल में प्रतिदिन बढ़ती भीड़ और संसाधनों की कमी के कारण हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं। स्थिति यह है कि बच्चों के वार्ड में एक ही बेड पर दो से तीन बच्चों को सुलाया जा रहा है, जिससे न केवल इलाज प्रभावित हो रहा है बल्कि संक्रमण फैलने का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है।

 


जोधपुर: उम्मेद अस्पताल में प्रतिदिन बढ़ती अव्यवस्था

जोधपुर स्थित उम्मेद अस्पताल, जो प्रदेश का प्रमुख बाल चिकित्सालय माना जाता है, इन दिनों गंभीर अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में है। अस्पताल में प्रतिदिन बढ़ती भीड़ और संसाधनों की कमी के कारण हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं। स्थिति यह है कि बच्चों के वार्ड में एक ही बेड पर दो से तीन बच्चों को सुलाया जा रहा है, जिससे न केवल इलाज प्रभावित हो रहा है बल्कि संक्रमण फैलने का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है।

हाल के दिनों में मौसम परिवर्तन के चलते बच्चों में वायरल, सांस और अन्य संक्रमणों के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। मरीज बच्चों की संख्या बढ़ने के कारण अस्पताल की व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। परिजनों का आरोप है कि पर्याप्त बेड, साफ-सफाई और मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, लेकिन इसके बावजूद नए मरीजों को भर्ती किया जा रहा है।

सबसे गंभीर मामला तब सामने आया जब 11 वर्ष के एक लड़के के साथ उसी बेड पर 9 वर्ष की एक लड़की को लिटा दिया गया। इस पर परिजनों ने आपत्ति जताई और अस्पताल प्रशासन से शिकायत की। परिजनों का कहना है कि यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्थिति पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।

शिकायत करने पर मरीज बच्चे के परिजनों के साथ अस्पताल स्टाफ द्वारा गलत व्यवहार किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए तो स्टाफ ने उन्हें धमकाने और अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया। इस पूरे घटनाक्रम से आहत परिजनों ने अस्पताल के शिकायत रजिस्टर में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि उम्मेद अस्पताल जैसे बड़े सरकारी संस्थान में इस तरह की अव्यवस्था बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

वहीं, इस संबंध में अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों की संख्या अचानक बढ़ने के कारण अस्थायी रूप से ऐसी स्थिति बनी है और व्यवस्थाओं को सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, परिजनों का कहना है कि जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक बच्चों और उनके परिवारों को इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

 
 
 
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Author
Rajendra Harsh
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